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अब रमेश पोखरियाल (निशंक )की डिग्रियों पर बबाल

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नई दिल्ली : पहले स्मृति ईरानी और अब नए नवेले मानव संसाधन विकास मंत्री पर उनकी डिग्री को लेकर विवाद शुरू हो गया हैं। दरअसल नए नवेले मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाते हैं। 30 मई को जब राष्ट्रपति भवन में रमेश पोखरियाल (निशंक ) ने कैबिनेट मंत्री के रूप में सपथ ली तो उसमें भी उन्होंने उसी झूठी डिग्री का सहारा लिया जिस कारण वे विवादों में हैं। उन्हें रमेश पोखरियाल (निशंक ) के रूप में शपथ लेने के लिए बुलाया गया , जबकि उन्होंने शपथ की शुरुवात ही डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से की।देश के संबिधान की झूठी सपथ , सबूत के तौर पर ये वीडियो देखिये https://www.youtube.com/watch?v=evkAD_Tei1U वाह रे देश को शिक्षा का मार्ग दिखने वाले मंत्री , धन्य हैं आप।

अब जिक्र उस डिग्री का जिस कारण निशंक चर्चा में है।रमेश पोखरियाल का दावा हैं कि श्रीलंका स्थित ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से उन्हें एक नहीं दो-दो मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी है। जबकि यह यूनिवर्सिटी श्रीलंका में रजिस्टर्ड ही नहीं है।इसे वहा की सरकार ने बोगस यूनिवर्सिटी मैं शामिल किया हुआ है।

निशंक को 1990 के दौरान कोलंबो ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने  डी लिट (Doctor of Literature) की डिग्री दी। शिक्षा में योगदान के लिए उन्हें यह डिग्री दी गई। अब ये तो निशंक ही बता सकते हैं कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में क्या किया। इसी यूनिवर्सिटी ने उन्हें एक और डी लिट डिग्री दी जब वे उत्तराखंड के मुख्यंत्री थे। इस बार शिक्षा के लिए नहीं बल्कि विज्ञान में योगदान के लिए उन्हें डिग्री दी गई।

झूठ की पुष्टि करता CSIR का पत्र

काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR पत्र संख्या 17/66/27/94-PPS दिनांक 18.11.1998) के 1998 के पत्र की एक प्रति,में भी इस ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, के बारे में सूचित किया गया है कि आपकी जानकारी और रिकॉर्ड के लिए इस विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली डिग्री / डिप्लोमा या किसी अन्य शैक्षणिक अंतर को कोई मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। ”

शिक्षा को भी छिपाया
पिछले तीन चुनावो में निशंक द्वारा भरे गए शपथपत्रों में भी कही भी उन्होंने अपने नाम की आगे डॉ का इस्तेमाल नहीं किया है।तो कैबिनेट मंत्री की शपथ में उन्होंने डॉ शब्द का क्यों किया?

बड़ा सवाल
पिछले तीन शपथपत्रों में निशंक ने अपनी योग्यता : M A हेमवती नंदन बहुगुणा , गढ़वाल यूनिवर्सिटी और श्रीलंका से मिली दोनों झूठी डिग्री का ही जिक्र किया हैं। यहां एक और मजेदार बात यह हैं कि उन्होंने दसवीं से लेकर स्नातक तक की डिग्री का कही भी जिक्र नहीं किया हैं । जबकि शपथपत्र में साफ़ जिक्र हैं कि आपको विद्यालय /महाविदयालय /विश्वविद्यालय का नाम और उस बर्ष का जिक्र करना हैं जिसमें पाठ्यक्रम पूरा किया गया हैं।. बीजेपी के बरिष्ठ नेताओं ने भी अपने सपथ पत्रों में इसका पूरा जिक्र किया हैं। मशलन राजनाथ सिंह ने दसवीं से लेकर आगे तक की पूरी पढाई ,स्कूल व बर्ष का पूर्ण जिक्र अपने शपथपत्र में किया हैं , तो निशंक ने ये बात क्यों छिपाई हैं ? आखिर चुनाव आयोग के अधिकारी क्या कर रहे थे ? क्यों नहीं उनसे उनकी शैक्षणिक योग्यता का पूरा विवरण लिया गया ?

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