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आखिर कहाँ गायब हो गई बीपीएल परिवारों की जांच रिपोर्ट ? तीन साल बीतने के बाद भी प्रशासन चुप क्यों ?

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कौन कुंडली मारे बैठा हैं जखोली बिकासखण्ड के बीपीएल परिवारों की लिस्ट पर ?

कौन छीन रहा हैं गरीबों की रोटी,कपड़ा और मकान ?

रामरतन सिह पंवार

जखोलो/रुद्रप्रयाग।बिकासखंड जखोली के अन्तर्गत वर्ष 2002 में समस्त ग्राम पंचायतों मे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को लेकर एक सर्वेक्षण कराया गया था। जिस ग्रामीण की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय व रहने के लिए आवास की सुबिधा उपलब्ध नही है, ऐसे परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाना सरकार का मकसद था। सर्वे हुआ भी लेकिन इसमें ऐसे परिवारों को भी बीपीएल सूची मे जोड़ दिया गया जो कि  आर्थिक व अन्य स्रोतों से भी  संपन्न परिवारों की श्रेणी मे आते है। जबकि कई गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति तब भी दयनीय थी और आज भी वैसी ही है ऐसे परिवारों को बीपीएल श्रेणी से वंचित रखा गया।

बिकासखंड जखोली मे वर्तमान मे 108 ग्राम पंचायतें हैं। लगभग सभी गांवो के एक जैसे ही हाल है। सरकार से मिलने वाला सरकारी योजनाओं का लाभ भी उन्ही परिवारों को निरन्तर मिल रहा जो सम्पन हैं। जिन परिवारों के पास अपने रहने के लिए कोई छत नही थी, उनको इंदिरा आवास,व अटल आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण योजनाओ का लाभ नही मिला, बल्कि उन परिवारों को मिला जिन्होंने फर्जी रुप से गरीबी रेखा से नीचे जीबन यापन करने वाले कार्ड बनाये थे । इस बारे जब मामला आगे बढ़ा तो बर्ष 2017 में जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग की अध्यक्षता मे तहसील दिवस कार्यक्रम में यह मुद्दा जोर शोर से उठाया गया ,जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा
जखोली मे पुनः बीपीएल सर्वे दुबारा से करवाने का मुद्दा उठाया गया । ताकि गरीब परिवारों को इंसाफ मिल सके।

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बर्तमान रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी मंगेश  घिल्डियाल ने जखोली खंड बिकास अधिकारी को टीम गठित कर जाँच व सर्वेक्षण के आदेश दिये थे।जिससे सर्वप्रथम ग्राम पंचायत त्यूंखर को बीपीएल सर्वेक्षण के लिए चुना गया था। शिकायत के बाद विकासखंड कार्यालय से तीन कर्मचारी तो जरूर आये, लेकिन गांव का आधा अधूरा सर्वे करके चले गये। तीन बर्ष बीत गए हैं उन अधिकारियों के जाने की बाद
आज तक सर्वे करने त्यूंखर गांव दुबारा नहीं लौटे । जिलाधिकारी के तत्कालीन आदेश के अनुसार जाँच आख्या एक सप्ताह के अन्दर जिलाधिकारी कार्यालय को बिकासखंड अधिकारी जखोली द्वारा सौंपी जानी थी, लेकिन विडम्बना इस बात की है कि न ही पूर्ण सर्वे किया गया, और न ही रिपोर्ट मिली।

आखिर क्या वजह है कि जिला प्रशासन आज भी इससे आँख मूंदे हुए है। या जान बूझकर रिपोर्ट पर पर्दा डालने की फ़िराक में हैं। जनता का आरोप है कि खंड बिकास अधिकारी ने जिलाधिकारी के आदेशों को दरकिनार कर न्यायोचित कार्य नही किया है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते बीपीएल लिस्ट मे हुई धाँधली की जाँच कर यथाशीघ्र गरीब परिवारों के साथ इंसाफ किया जाए, ताकि उन्हें सरकारी योजना का लाभ मिल सके।

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