Home NRC ISSUE IN UTTARAKHAND आखिर कितने बांग्लादेशी हैं उत्तराखंड में , कितने रोहिंग्यास पकडे गए बिगत...

आखिर कितने बांग्लादेशी हैं उत्तराखंड में , कितने रोहिंग्यास पकडे गए बिगत सालो में हैं किसी के पास जवाब ?

163
0

राकेश डंडरियाल

देहरादून : बीजेपी शासित असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) अभी पूरी तरह से लागू भी नहीं हो पाया है, कि अब उत्तराखंडी रावत -बंधु भी एकजुट होकर बुदबुदाने लगे है , में भी करूँगा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर अपने राज्य में, तो दूसरा कहाँ पीछे रहने वाला । अचानक जैसे दुकान पर फ्री के पकोड़े मिलने शुरू हो गए हो । हरियाणा में खट्टर ने एनआरसी की बात क्या की,कि उत्तराखंडी छोटे बड़े रावत भी कुलबुलाने लगे। अब खट्टर जी को अगर दूसरा मौका मिलेगा तो ही वे एनआरसी लागू कर पाएंगे अन्यथा सपना ही बनकर रह जाएगा हरियाणा का एनआरसी। वैसे भी खट्टर साहब ने दूसरा मौका तलाशने के लिए ही ये रामबाण छोड़ा हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि उत्तराखंड में एनआरसी लागू हो सकता है। इस बारे में कैबिनेट के साथ चर्चा करेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री जी पहले ये तो पता होना चाहिए कि प्रदेश में कितने बांग्लादेशी हैं , कितने रोहिग्या हैं। पिछले साल रोहिग्या पर उत्तराखंड में बड़ी चर्चा हुई थी , चैंपियन जो अब आपकी पार्टी में नहीं हैं उन्होंने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था, तब मुख्यमंत्री जी ने भी इस बिषय को उत्तराखंड के लिए गंभीर माना था, और हैं भी। और होने भी चाहिए। पर मुख्यमंत्री जी आपके पास प्रदेश का ग्रह मंत्रालय भी हैं क्या आप उत्तराखंड व देश को बताएँगे कि कितने रोहिग्या आपने पहचाने हैं ? बांग्लादेशियो की तो बात छोड़ दो।

मुख्यमंत्री रावत ने हाल ही में कहा था कि उत्तराखंड में एनआरसी घुसपैठ रोकने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। राज्य के उधम सिंह नगर जिले के कई क्षेत्रों में बांग्लादेशी लोगों की संख्या अधिक है। 1971 के बाद बड़ी संख्या में बांग्लादेशी लोग उत्तराखंड आ गए थे। ये लोग खासकर सितारगंज में बसाये गए थे , जिनकी अनुमानित संख्या 9 लाख के लगभग हैं , तो आप इन्हे यहाँ से बाहर कर देंगे ?

पिछले ढाई -तीन सालो में आपकी सरकार ने प्रदेश में कितने बांग्लादेशियो की पहचान की हैं, और उनको वापस भेजने के लिए क्या प्रबंध किये हैं? क्या हैं आपके पास एनआरसी लागू करने के लिए मजबूत आधार? हमारा मानना हैं कि देश हित व प्रदेश हित सर्वोपरि हैं , लेकिन नेताओं के पास तथ्य कम और बातें ज्यादा होती हैं । आशा हैं कि जिम्मेवार नेता जब भी एनआरसी पर बात करेंगे तो तथ्यों को सामने रखते हुए करेंगे।
बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत से वापस भेजना इतना आसान नहीं है जितना बड़बोले नेता सोचते हैं । इसके कई कारण है। मसलन अगर असम की अगर बात करें तो तकनीकी रूप से जिन लोगों को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रर में विदेशी घोषित किया गया है, उन्हें बांग्लादेश अपना नागरिक नहीं मानता है। वैसे में बांग्लादेश इन्हें वापस लेगा यह संभव नहीं है। तो अगर असम में यह स्थिति हैं तो उत्तराखंड में भी एनआरसी कागजी लड़ाई ही बनकर न रह जाय।
वैसे भी NDA सरकार के आकड़े तो लगातार हो रहे हो हल्ले के बीच दिखा रहे हैं कि बांग्लादेश को वापस भेजे गए लोगो के संख्या में लगातार साल दर साल गिरावट आती जा रही हैं । ये हम नहीं NDA सरकार के आकड़े बता रहे हैं ।

आखिर कितने बांग्लादेशी भेजे गये वापस बांग्लादेश

2013 में 5234

2014 में 989

2015 :में 474

2016 में 308

2017 में 51

सोर्स : मार्च 14 , 2018 राज्य सभा में डिबेट के दौरान किरिन रिज्जू के जवाब पर आधारित

LEAVE A REPLY