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आग का बिकराल रूप : कहाँ हैं सरकारी तंत्र ? एक एसडीआरएफ के अलावा कोई नहीं है क्या ?

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देहरादून : जंगलो को जीवन देने वाला माना जाता हैं लेकिन आज वही जंगल आग की लपटों से जल रहे है और अपने ही अस्तित्व के लिए तरस रहे है. आखिर कौन मेरी आग को बुझायेगा।

सौजन्य से : एसडीआरएफ उत्तराखंड(नई टिहरी)

गढ़वाल मंडल में अब तक 576 आग लगने के मामले सामने आये हैं। वही कुमाऊं मंडल में अब तक सबसे ज्यादा 1056 आग लगने के मामले सामने आये हैं। कुल 1708 आग लगने की घटनाये हो चुकी हैं जिसमें अब तक 2344.455 हैक्टर जमीन को नुकसान हुआ हैं। प्रदेश मैं चारो ओर घना धुँवा ही धुँवा दीखता हैं। लोगो को सास लेने में भी परेशानी हो रही है। जलते जंगलो के कारण उत्तराखंड के तापमान पर भी असर पड़ा हैं।

टिहरी में आग के दृश्य उत्तराखंड एसडीआरएफ द्वारा भेजी गई फोटो

टिहरी जनपद के जंगल इन दिनों भीषण आग के चपेट में है। सबको जीवन देने वाला जंगल आज आग की लपटों से जल रहा है और अपने ही अस्तित्व के लिए तरस रहा है। जंगल में लगी इस आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग का कोई भी कर्मचारी यहां नजर नहीं आ रहा है।

विकासखंड कीर्ति नगर के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज खोला कडकोट आग की चपेट में आ गया। आग से विद्यालय के तीन कक्ष जल गए, विद्यालय का फर्नीचर भी जलकर राख हो गया।
अल्मोड़ा
कालीमठ और बिनसर के जंगल में अचानक आग लग गई। सूचना मिलने पर वन विभाग, प्रशासन और दमकल विभाग की टीम मौके पहुंच गई।

चौखुटिया में सिमलखेत के जंगल में चार दिन से लगी आग शुक्रवार को ग्रामीणों ने सरपंच शिशुपाल नेगी के नेतृत्व में सामूहिक रूप से प्रयास कर आग बुझाई।

सोमेश्वर
सोमेश्वर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत चारों ओर जंगल आग की चपेट में है, वन विभाग आग पर काबू नहीं पा सका है।

नैनीतालः
दोगांव की ऊपरी पहाड़ियों पर स्थित हिमालय फार्म में भ्रमण और जैविक खेती के गुर सीखने आई फ्रांसीसी महिला एलिस (25) और फार्म मैनेजर पंकज रावत जंगल में चारों ओर फैली आग के बीच घिर गए।

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