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उत्तराखंड में मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से बिख्यात चोपता, दुगलबिट्टा का होगा कायाकल्प

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दिलबर सिंह बिष्ट

इको टूरिज्म को बढ़ाने को लेकर इको डेवलेपमेंट कमेटी का होगा गठन

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से बिख्यात चोपता दुगलबिट्टा में इको टूरिज्म की संभावनाओं को तलाशते हुए जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल आज चोपता पहुंचे। जिलाधिकारी के साथ राजस्व बिभाग , पर्यटन बिभाग व वन विभाग तथा स्थानीय हक हकूकधारियों के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया। साथ ही लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में अधिकारियों के साथ ही स्थानीय व्यापारियों की बैठक ली।

गौरतलब हैं कि चोपता में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां सालभर पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है, लेकिन सैंचुरी एरिया में होने के कारण इस क्षेत्र का विकास जितना होना चाहिए था उस हिसाब से नहीं हो पा रहा है। ऐसे में क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से जिला प्रशासन ने कार्यवाही शुरू कर दी है।

इस बीच आज जिलाधिकारी ने चोपता, दुगलबिट्टा में इको टूरिज्म को बढ़ाने को लेकर इको डेवलेपमेंट कमेटी के गठन की बात की हैं है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कमेटी में स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जायेगा, जो क्षेत्र की साफ सफाई का भी ध्यान रखेंगे।

इसको लेकर जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने राजस्व, पर्यटन, वन विभाग एवं स्थानीय हक हकूकधारियों के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान देखा गया कि राजस्व व वन विभाग की कितनी भूमि है, जिस पर स्थानीय लोग परमीशन लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व और वन विभाग की भूमि का डिमारकेशन किया गया है। निरीक्षण के दौरान मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि इको टूरिज्म के तहत छानियों को विकसित किया जायेगा, जिससे पर्यटकों को लाभ मिल सके और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सके।

इसके पश्चात पहाड के आर्थिक सुदृढीकरण, स्वरोजगार हेतु पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होम स्टे योजना की बैठक विकास खण्ड ऊखीमठ के श्री तुगनाथ मंदिर प्रांगण, मक्कूमठ में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाये है। मक्कू, जगपुडा व पाव में इस दिशा में कार्य कर, आदर्श पर्यटक गांव के रूप में विकसित किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने पहाडी संस्कृति, विरासत,सभयता, शैली की जानकारी देश-विदेश तक पहुचान के लिए होम स्टे को पहाडी/परम्परागत काष्ठ व पठालों से निर्मित करने का सृझाव दिया। इसके साथ ही पुराने घरों को भी जीर्णोदार पहाड़ी शैली में कर पर्यटकों को ठहरने, खाने व शौचालय की सुविधा देने की बात कही। उन्होने महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से इस दिशा में कार्य करने को कहा। कहा कि खेतो में पहाड़ी शैली में काॅटेज बनाये जा सकते है। हमें पर्यटकों को होम स्टे के माध्यम से घर जैसा वातावरण उपलब्ध कराना होगा।

इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी वैभव सिंह, पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल, अधिशासी अभियंता गढ़वाल विकास निगम डीएस राणा सहित स्थानीय सरपंच एवं हक हकूकधारी मौजूद थे।

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