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उत्तराखंड सरकार के लिए चुनौती बने एक लाख चालीस हजार प्रवासी लोग

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राजधानी दिल्ली से सबसे ज़्यादा 39, 429 आवेदन

राकेश डंडरियाल

देहरादून : प्रवासी यात्रा पंजीकरण के बाद अब सरकार की पहली प्राथमिकता होगी कि किस प्रकार से इतनी भीड़ को उनके गंतब्य स्थानों तक पहुंचाया जाए, सरकार का रोल यही नहीं ख़त्म हो जाता हैं , सवाल हैं कि इतने लोग जब उत्तराखंड के ग्रामीण इलाको में पहुंचेंगे उनके लिए 14 दिनों का कोरंटीन भी सुनश्चित किया जाना हैं । वास्तव में यह त्रिवेंद्र सिंह सरकार के लिए एक कठिन परीक्षा की घडी हैं , देखना यह होगा कि वह किस प्रकार इस परीक्षा को पास करती हैं ।

उत्तराखंड के प्रवासी लोग जो बाहरी राज्यों में फंसे हैं उन्हें प्रदेश में लाने का ऑपरेशन शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने आईपीएस संजय गुंज्याल और आईएएस शैलेश बगौली को यह जिम्मेदारी दी है। आज (रविबार के आकड़ों के अनुसार सुबह तीन बजे तक प्रवासी यात्रा पंजीकरण वेबसाइट पर 137969 लोग अपने को रजिस्टर करवा चुके हैं ।

अपनी गाड़ियों से आने वालों की संख्या 8273 हैं जिसमें से गढ़वाल रीजन के 5026 तथा कुमाऊं रीजन के 3247 लोगों ने अपनी गाड़ियों से आने की परमिशन मांगी हैं ।दूसरी तरफ सरकारी गाड़ियों से आने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा हैं । गढ़वाल और कुमाऊं में इनकी संख्या क्रमशः 64994 व 64702 हैं।कुल योग 129696 है। यही वह संख्या है जो सरकार के लिए सिरदर्द बन सकती हैं , पहले तो बसों का इंतजाम करना , उसके बाद एक एक यात्री को निर्धारित दुरी पर रखना , बसों से उनको उनके इलाके तक पहुंचना , वहां 14 दिन के कोरंटीन की व्यवस्था करवाना भी शामिल हैं ।

दिल्ली से सबसे ज्यादा प्रवासी लोग उत्तराखंड जाना चाहते हैं ,गढ़वाल जाने वालों में जो लोग अपनी गाड़ी से जाना चाहते हैं उनकी संख्या 1578 हैं , जबकि यही संख्या कुमाऊं के लिए 1204 हैं , वही सरकारी बसों से जाने वालों में गढ़वाल के 16303 लोग हैं जबकि कुमाऊं के 20344 हैं

सरकार की पहली प्राथमिकता हैं कि सबसे पहले शेल्टर होम और कैंप में रह रहे लोगों को लाया जाएगा,जिसके लिए कुछ राज्यों के लिए बसें रवाना हो चुकी हैं, जहां से जल्द ही प्रदेश में लोग लाए जाएंगे , और उनको पूरे मेडिकल चेकअप के बाद अलग-अलग क्षेत्रों को भेजा जाएगा । देश के बिभिन्न प्रदेशों के कैम्पों में रहा रहे लोगों को पहले कोरेंटिन के लिए भेजा जाएगा लेकिन जो लोग अन्य जगह से आ रहे हैं उन्हें इंस्टीट्यूशनल कोरेन्टीन किया जाएगा ।

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