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उत्तराखंड सरकार 108 सेवा के 717 कर्मचारियों एवं उनके परिवारों भूखा मारने पर उतारू ।

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देहरादून : सबका साथ सबका बिकास : हम बात कर रहे हैं उस प्रदेश की जहाँ डबल इंजन की सरकार चल रहीं हैं, यानि उत्तराखंड । हाल ही में डबल इंजन वाली इस सरकार ने 108 सेवा को नई कंपनी कैंप को दे दिया हैं । पुरानी कंपनी जीवीके ने 108 से जुड़े कर्मचारियों को आनन् फानन में सेवा समाप्ति समाप्ति करने का नोटिस पकड़ा दिया हैं । यानि पिछले 11 सालो से जो कर्मचारी ईमानदारी से जनता के सुख दुःख के साथी बने थे , वे अब खुद ही रोड पर आ जायेंगे । क्या सरकार ने इन कर्मचारियो या उनके 2000 बच्चो का ध्यान रखा ? क्या नई कंपनी के साथ इन कर्मचारियों के समावेश की बात की गई ? ऐसे कई प्रश्न हैं जिनका सरकार को जवाब देना होगा । कर्मचारिओं ने मांग रखी है कि उन्हें नई कंपनी में समायोजित किया जाय।
अब जीवीके इन कर्मचारियों ने 24 अप्रैल से आपातकालीन सेवा 108 के पहिये रोक देने की धमकी दी हैं । कर्मचारियों ने 30 अप्रैल के बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी भी दी है। हालांकि, जीवीके के अधिकारियों ने इस चेतावनी पर आपत्ति जताई है और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है , एक तो चोरी और दूसरी तरफ सीना जोरी । नौकरी से निकालने का फरमान तो जारी कर दिया अब क्या उत्तराखंड से भी बाहर करने का बिचार हैं ?

मई 2008 से शुरू हुई जीवीके ईएमआरआई पिछले साल से ही 108 एंबुलेंस सेवा को नहीं चलाना चाहती थी । जीवीके कंपनी में 717 कर्मचारी 30 अप्रैल को सेवा समाप्ति के नोटिस पर काम कर रहे हैं। यानी 30 अप्रैल के बाद उनके हाथ में कोई काम नहीं होगा।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में 108 सेवा की एंबुलेंस आपात स्थिति के मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाती है। उत्तराखंड में इसका संचालन जीवीके ईएमआरआई कंपनी करती है।हालाँकि 2008 से शुरू हुई 108 एंबुलेंस सेवा अब खुद मरणासन्न स्तिथि में हैं ।

जीवीके व उत्तराखंड सरकार की हकीकत

2008 में सरकार ने जिस जीवीके( निजी )संस्थान से 108 सेवा संचालन का करार किया था वह 2013 तक आस्तित्व में नहीं थी।
जिस कंपनी के माध्यम से सेवाएं चल रही हैं उसके साथ औपचारिक एमओयू नहीं हुआ है, इसके बाद जब नवंबर 2012 में मामला उजागर हुआ। आखिर इतने लंबे समय तक तक बिना करार किए सेवाएं कैसे चलती रही है?

कैसे हुआ ये कारनामा
सत्यम कंप्यूटर्स की (इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट) के साथ 2008 में तब के मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी के सीधे निर्देश पर 108 सेवा संचालित करने की बात हुई। उत्तराखंड शासन ने (इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट) से एमओयू में इमरजेंसी सेवाएं संचालित करने का 95 फीसदी राज्य सरकार को तथा 5 फीसदी ईएमआरआई को दिया। इसके बाद जनवरी 2009 में सत्यम कंप्यूटर्स आर्थिक घोटाले में फंस गया, जिसके बाद ईएमआरआई को जीवीके कंपनी ने खरीद लिया। जिसके बाद उत्तराखंड सरकार ने पुराने करार को चालू रखते हुए शतप्रतिशत अनुदान का लाभ भी कंपनी को दे दिया।

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