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उत्तराखंड से गोरखपुर निकले अमरमणि त्रिपाठी सात साल से गायब : उत्तराखंड का पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में ।

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देहरादून : मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोपी उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी पिछले साढ़े सात साल से कहां हैं, उत्तराखंड वालों को कोई अता पता नहीं हैं ।
अब ना तो पुलिस प्रशाशन को पता हैं और ना ही दून जेल प्रशासन को। इस मामले ने अब पूरे सरकारी सिस्टम को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया हैं।

अमरमणि त्रिपाठी को मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोप में 9 मई, 2003 में लखनऊ से की गिरफ्तार किया गया था। बताया जाता है कि अमरमणि त्रिपाठी का मधुमिता शुक्ला से प्रेम संबंध था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि मौत के समय मधुमिता के पेट में सात महीने का बच्चा था।
देहरादून की सीबीआई अदालत ने 2007 में त्रिपाठी और अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कुछ समय देहरादून की जेल में बिताने के त्रिपाठी ने ज्यादातर वक्त गोरखपुर मेडिकल कॉलेज या फिर वहां की जेल में बिताया।

सजायाफ्ता कैदियों को पैरोल देने के लिए सरकारी नियम-कानून बने हुए हैं, लेकिन अमरमणि त्रिपाठी के लिए उत्तराखंड ने पूरे सिस्टम को ताक पर रख दिया।

मार्च, 2012 में अमरमणि को एक केस के सिलसिले में देहरादून जेल से गोरखपुर ले जाया गया था, तब से अब तक सात साल , 6 माह बीत जाने को बाद भी वे लौटे नहीं है
। बीमारी का बहाना करके अमरमणि ने काफी समय गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और उसके बाद लखनऊ और दिल्ली एम्स में बिताया। मजेदार बात यहाँ यह हैं कि
गोरखपुर का जेल प्रशासन उत्तराखंड को नहीं बता रहा है कि त्रिपाठी कहां हैं?

क्या हुआ नैनीताल हाई कोर्ट के आदेश का ?
देहरादून जेल से गोरखपुर जाकर मेडिकल कॉलेज में भर्ती किए गए अमरमणि को वापस दून जेलभेजने के लिए मधुमिता बहन निधि ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सितंबर, 2019 में हाईकोर्ट ने अमरमणि को देहरादून शिफ्ट करने के आदेश दिए थे, लेकिन तब से उन्हें यहां नहीं लाया जा सका है।

कहाँ हैं कानून
कानून के अनुसार किसी भी सजायाफ्ता कैदी को दो महीने से अधिक की पैरोल नहीं मिल सकती हैं , तो अमरमणि को कैसे ? लेकिन अमरमणि की पैरोल को लेकर सरकार के पास ही पूरी जानकारी नहीं है। उत्तराखंड में पहले जिला प्रसाशन को 15 दिनों तक पैरोल देने का अधिकार था, लेकिन अब सरकार ने इसे शासन के अधीन कर दिया है। तो क्या मान लिए जाय कि राज्य की त्रिवेंद्र सरकार को भी इस बारे में कुछ पता नहीं हैं , या वे जानबूझकर अनजान बने हुए हैं ।

अमरमणि त्रिपाठी 13 मार्च, 2012 को एक मामले की सुनवाई में देहरादून जेल से अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गोरखपुर की अदालत में पेशी के लिए भेजे गए थे। तब से वे वापस देहरादून नहीं लौटे। इस बारे में गोरखपुर जेल प्रसाशन को पत्र भी भेजे गए, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला है।
डॉ, पीवीके प्रसाद महानिदेशक, जेल देहरादून

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