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उत्तराखंड हाई कोर्ट का अहम् फैसला : जनता की गाढ़ी कमाई पर डॉक्टर बने हो , तो देने होगी पहाड़ में सेवायें ।

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नैनीताल : उत्तराखंड हाई कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे पहाड़ी इलाको के लिए राहत भरा आदेश जारी किया है।गौरतलब हैं कि ये डॉक्टर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को आड़ बनाकर बांड के आधार पर न्यूनतम फीस में एमबीबीएस कर रहे हैं, लेकिन पहाड़ में पांच साल तक सेवा देने से पीठ दिखा रहे हैं, इन चिकित्सकों को हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है।

हाई कोर्ट ने सरकार के पैसों से डिग्री लेने वालों को बांड के अनुसार सेवा करने का सख्त निर्देश जारी किया हैं । साथ ही उत्तराखंड सरकार को छह सप्ताह के अंदर इन चिकित्सकों को पहाड़ में नियुक्ति देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि जो चिकित्सक ज्वाइन नहीं करते हैं, उनसे फीस की वसूली की जाए। कोर्ट के आदेश को सरकार के साथ ही पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत के तौर पर माना जा रहा है। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर सरकार की विशेष अपील को निस्तारित कर दिया है।

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के दस चिकित्सकों से संबंधित आदेशों के खिलाफ सरकार की ओर से दायर विशेष अपील पर सुनवाई की। खंडपीठ ने निर्देश दिए है कि इन चिकित्सकों को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करें। सरकार की ओर से मुख्य अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि मेडिकल कॉलेजों द्वारा प्रोस्पेक्टस में साफ तौर पर उल्लेख किया था कि जो छात्र सरकारी कोटे में प्रवेश लेे रहे हैं, उनको उत्तराखंड में सेवा के लिए पांच साल का बांड भरना होगा। उन्हें ही फीस में छूट दी जाएगी।

कोर्ट ने साफ किया कि जो डॉक्टर ड्यूटी ज्वाइन नहीं करेंगे, उन्हें सब्सिडाइज्ड शुल्क घटाते हुए सरकार को बिना सब्सिडी वाली शुल्क की धनराशि 18 फीसद ब्याज के साथ लौटानी होगी।

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