Home Uncategorized एक महाराज के आगे नतमस्तक उत्तराखंड ,कोरोना पर दोहरे मापदंड क्यों ?

एक महाराज के आगे नतमस्तक उत्तराखंड ,कोरोना पर दोहरे मापदंड क्यों ?

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राकेश चंद्र

देहरादून : भोली भाली जनता के लिए तो मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस महकमे के बरिष्ठ अधिकारी रोज कुछ न कुछ प्रवचन जारी करते हैं, लेकिन देवभूमि के इन देवताओं के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए शायद सबको साप सूंघ गया हैं। लॉकडाउन का उल्लघंन करने पर प्रदेश में अभी तक कुल 3519 अभियोगों 25690 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।लेकिन जिस मंत्री ने 27 लोगों की जान खतरे में डाल दी हैं, उसको बचाने के लिये सीएम से लेकर डीएम,शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक, सभी एक के बाद एक बयांन जारी कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह से महाराज का झंडा ऊँचा रहे , आखिर महाराज जो ठहरे । फ्री का चाय-नाश्ता बाटने वालों को तो हाई-रिस्क में डाल दिया गया हैं लेकिन , महाराज सहित सत्ता के देवताओं को लो-रिस्क कॉन्टेक्ट वाले लोगों को क्वारंटाइन में छूट दी गई। धन्य हैं देवभूमि उत्तराखंड।

अब सुनिए शासकीय प्रवक्ता को ,महाराज ने घर में मेहमानों के आने की जानकारी समय पर दी थी, साथ ही मेहमानों को होम क्वारंटाइन भी किया गया था। पत्नी का कोरोना पॉजिटिव आने पर उन्होंने अस्पताल ले जाने में भी देरी नहीं की। स्टॉफ सहित परिजनों के टेस्ट करवाए। कांग्रेस इस मामले में बयानबाजी कर छोटी राजनीति कर रही है।

सरकारी प्रवक्ता जी जनता को यह भी तो बताओ कि महाराज जब कैबिनेट मीटिंग अटेंड कर रहे थे तब किसी को उनकी पत्नी का बारे में पता नहीं था क्या ? अमृता रावत का स्वास्थ्य 24 मई को खराब हुआ था, तब से आप क्या कर रहे थे ? क्या इंतजार कर रहे थे और किसका ? क्या आपका ख़ुफ़िया तंत्र कोरोना की नींद सोया था ?

एक और नया सगूफा सुनिए , केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी कोरोना पॉजिटिव अपने घर पर भी रह सकता है,जरूर कौशिक जी , लेकिन देवभूमि इतनी पवित्र हैं कि उसने राज्य में अभी तक इस नियम को लागू नहीं किया गया है, अब जब 27 लोगों की जान खतरे में हैं तो जामवंत को आख़िरकार याद आ ही गया हैं कि एक हनुमान रूपी कानून उनके पास हैं जो उड़ भी सकता हैं अतः जल्द इस पर निर्णय होगा। ताकि हनुमान जी जल्दी से जड़ी बूटी लेकर नेता जी को बचा सकें।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सतपाल महाराज अपनी पत्नी अमृता रावत के साथ 24 मई को दिल्ली से देहरादून लौटे थे। इस दौरान देहरादून के आशारोड़ी चेकपोस्ट पर सतपाल महाराज को स्क्रीनिंग के लिए रोका भी गया था।लेकिन उत्तराखंड पुलिस के बड़े अधिकारी के निर्देश पर उन्हें जाने दिया गया। तो क्या सतपाल महाराज के साथ उस पुलिस कर्मी के खिलाफ भी FIR नहीं होनी चाहिए ?

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