Home JUDICIARY एनआइटी व प्रदूषण मामले में उत्तराखंड सरकार को हाई कोर्ट का...

एनआइटी व प्रदूषण मामले में उत्तराखंड सरकार को हाई कोर्ट का डबल झटका

199
0

केंद्र और राज्य सरकार को भी फटकार लगाई

नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आज श्रीनगर एनआइटी मामले में आदेश की अवमानना करने पर राज्य सरकार पर कार्यवाहीका आदेश दिया हैं । कोर्ट ने इस बात पर भरी नाराजगी जताते हुए 27 मार्च को पहाड़ अथवा मैदान में कैंपस बनाने के लिए चार जगह चिन्हित कर न्यायालय को बताने का आदेश दिया था। कोर्ट के इस आदेश के बावजूद इस मामले में कोई कार्यावाही नहीं हुई। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई की । कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की सुस्ती के चलते इतने महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित संस्थान को उत्तराखंड से बाहर ले जाया जा सकता है।कोर्ट ने इस मामले में सरकार के खिलाफ याचिकाकर्ता को अवमामना की याचिका दायर करने को कहा है। याचिका कर्ता जसवीर का कहना था कि एनआईटी को हाइवे के किनारे स्थापित किया गया है। इससे कई छात्र तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ रहे हैं। संस्थान का अपना परिसर नहीं है और सरकार की उपेक्षा का ही सबब है कि संस्थान में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को जयपुर एनआईटी में प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।

उधर प्रदूषण के एक अन्य मामले में भी हाई कोर्ट की इसी बेंच ने सरकार को फटकार लगाई ,हाई कोर्ट ने प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्र‍ियों को अब नहीं बंद करने का सरकार से कारण पूछा है, जबकि कई फक्ट्रियों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। कोर्ट ने इस सम्बन्ध में सोमवार तक शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया हैं ।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धनिक की खण्डपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता द्वारा कोर्ट में प्रदेश की सभी फैक्ट्रियो की लिस्ट पेश की गई और कोर्ट को बताया कि उन्होंने प्रदूषण फैला रही कम्पनियो को बन्द करने के नोटिस जारी किये थे परन्तु प्रशासन ,पुलिस व बिजली विभाग द्वारा इनको बन्द कराने के लिए सहयोग नही किए जाने का जिक्र किया। जिस कारण फैक्टरियों को बन्द कराने में दिक्कतें आ रही है। पूर्व में सरकार की तरफ से मौखिक रूप से खण्डपीठ को अवगत कराया गया था कि प्रदूषण बोर्ड द्वारा अभी तक मानकों को पूरा नही करने वाली फैक्ट्रियों को चिन्हित कर लगभग 20 प्रतिशत यानि 130 फैक्ट्रियों को बंद करने का नोटिस जारी कर दिया गया था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी राज्य सरकार से प्रदूषण फ़ैलाने वाली सभी फैक्ट्रियो की लिस्ट मांगी थी जिसमे कहा गया था कि प्रदेश की 30 से 35 फैक्ट्रियां ऐसी है जो केंद्रीय पर्यावरण बोर्ड के मानको को पूरा नही कर पा रहे है। इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वे इस पर कार्यवाही करे।

LEAVE A REPLY