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केदारनाथ के रावल पहुंचे ऊखीमठ, संशय खत्म

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देवेन्द्र चमोली
रुद्रप्रयाग-आखिरकार केदारनाथ धाम के कपाटों के खुलने पर रावल श्री भीमाशंकर लिगं की उपस्थिति पर बना संसय खत्म हो गया हैं। केदारनाथ के रावल 1008 जगतगुरु भीमशंकर लिंग जी आज महाराष्ट्र से भगवान् भोले की शीतकालीन गद्दी स्थल ऊखीमठ पहुंच गये है।
गौरतलब हैं कि कि भगवान शंकर के ग्यारहवे ज्योतिर्लिंग केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल को तय तिथि एंव मुहूर्त के अनुसार श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने की परंपरा के अनुसार रावल का डोली प्रस्थान सहित कपाट खुलने की पूजा में रहना आवश्यक है । लेकिन कोरोना महामारी के लॉकडाउन के चलते केदारनाथ के रावल नांदेड़ महाराष्ट्र में फंसे हुए थे , इस सम्बन्ध में खुद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ऊखीमठ पहुंचाने की मांग सरकार से की थी । गौरतलब हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी भगवान् केदरनाथ के भक्त हैं ।

लॉकडाउन व कोरोना महामारी बचाव व नियंत्रण के लिये प्रभावी नियमों के चलते उनका ऊखीमठ पहुंचने पर संशय बना हुआ था , उनके न पहुंचने की स्थिति में सरकार द्वारा पौराणिक पंरपराओं के अनुसार डोली विदाई व पट खोलने के विकल्प भी तलाशे जा रहे थे, लेकिन अब रावल श्री 1008 भीमाशंकर लिगं सड़क मार्ग से शीतकालीन गद्दीस्थल, ऊषामठ (ऊखीमठ) पहुँच गए हैं। फिलहाल उनके पंचकेदार शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ पहुँचने पर भगवान केदारनाथ धाम के कपाटोद्घाटन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विराम लग गया है। अब देखना यह है कि शासन प्रशासन द्वारा कोरोना महामारी के प्रवधानों के तहत रावल जी को आवश्यक 14 दिनों के क़्वारण्टीन में रखा जाता हैं या नहीं। यदि ऐसा किया जाता हैं तो रावल द्वारा कपाटों के खुलने संबधित सभी. प्रकार की पूजाओं में शामिल होना मुंमकिन नहीं हो पायेगा।

उखीमठ पहुँचने पर रावल श्री श्री 1008 जगद्गुरु भीमाशंकर लिंग का कहना है कि धर्म और मठ की परंपरा की रक्षा के लिए वे अपने पूर्व रावलों  और गुरुओं की भांति कभी भी जान की भी परवाह नही करेंगे। वहीं ऊखीमठ पहुंचने पर केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनोज रावत के भी रावल जी के दर्शन उनके कक्ष के बाहर से किये जाने की भी खबर है।

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