Home Uncategorized मंडुआ (कोदा) से बने केक , बिस्कुट और मोमोज का लीजिये मजा

मंडुआ (कोदा) से बने केक , बिस्कुट और मोमोज का लीजिये मजा

322
0

पौड़ी गढ़वाल की डॉ. नीलम ने शुरू की नई पहल , डा० नीलम बिष्ट, सहायक अध्यापिका,के रूप में राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्वाडू, विकास खण्ड कोट, पौडी गढ़वाल में कार्यरत हैं।

मंडुवा यानि कोदा मधुमेह,कैंसर, ह्रदय रोग, ब्लडप्रेशर रोगों की रोकथाम करने में सहायक हैं ।

कोदे में प्रोटीन,विटामिन डी,वसा,लौह अयस्क,केल्सियम, कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं ।

दिलबर सिंह बिष्ट

रुद्रप्रयाग।मंडुवा के बारे में कहा जाता है कि यह फसल अफ्रीकी महाद्वीप से लगभग 2 हजार साल पूर्व हमारे देश मे कर्नाटक से होते हुए नेपाल ,उत्तर भारत, बिहार ,झारखण्ड होते हुए उत्तराखंड के पहाड़ तक पंहुचा । सालो से यह पहाड़वासियों का परम्परागत भोजन हैं , औषधीय गुणों से भरपूर कोदे को मंडुवा ,रागी व नाचनी के नाम से भी जाना जाता है। एक समय में इसे गरीबों का खाना माना जाता था। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया आज वही मंडुवा अब लोगों के रोजगार के साथ -साथ आजीविका व अनेक प्रकार के पकवानो में भी शामिल हो चुका हैं।

मंडुआ के मोमोज

आज मार्किट में इसके पकवान कई प्रकार में पेश किये जा रहे हैं, कही इसके आटेसे बिस्कुट तो कही केक बन रहे हैं । आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस के डर से बाहर नहीं आ पा रही हैं , तो पहाड़वासियों के लिए ये किसी बरदान से कम भी नहीं हैं ।मंडुआ औषधीय गुणों से भी लबालब हैं , कोरोना के दौरान कैसे आम लोग इसका फायदा उठा रहे हैं उन्ही में शामिल हैं यूसेक निदेशक डॉ महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट की धर्मपत्नी डॉ नीलम बिष्ट हैं जो आजकल विद्यालय के बंद होने के कारण देहरादून स्थित अपने आवास पर पहाड़ी कोदा (मंडुआ ) के आटे से केक,मोमोज ,नोडल व झुंगारे से इडली बना कर इसकी पोष्टिकता को समाज के सामने रख रही हैं ,अपने परिवार के अलावा इलाके में भी इसका प्रचार प्रसार करने पर लगी हैं। जिससे कि नई पीढ़ी इसका फायदा उठा सके।

डॉ. नीलम ने बताया कि कोदा में प्रति 100 ग्राम में प्रोटीन 7.6 ग्राम,वसा 1.6 ग्राम,कार्बोहाइड्रेट 76.3 ग्राम, केल्सियम 370 मि.ग्राम,खनिज पदार्थ 2.2 ग्राम व लौह अयस्क 5.4 ग्राम पाया जाता है, इसके साथ ही फास्फोरस में विटामिन ए,विटामिन बी1थियामिन,बी2रिबोफ्लेविन व बी3 नियासिन,फाइबर,गंधक और जिंक  पाया जाता है।

मंडुआ का केक


यह एक क्षारीय अनाज है यह मधुमेह, ब्लडप्रेशर, हृदय रोग व कैंसर जैसे रोगों के रोकथाम में लाभकारी होता है। पहाड़वासियों के लिये कोदा (मंडुआ )किसी अमृत से कम नही है, पहाड़ी लोगों में हिमोग्लोबिन काफी होता है इसका मुख्य कारण कोदा ही है।यह लौह अयस्क से भरपूर होने के कारण खून,व कैल्सियम की कमी को दूर करता है। कोदा में विटामिन डी पाया जाता हैं । डॉक्टरों के अनुसार मंडुआ कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में सहायक हैं , इसके लगातार इस्तेमाल से हड्डियां,व चेहरे पर झुर्रियां नही पड़ती, छोटे बच्चों के विकास में भी लाभदायक है।
डॉ नीलम का कहना है कि अब जबकि शहरों से लोग रिवर्स पलायन कर पहाड़ों की ओर लौट रहे हैं, ऐसे में सही मौका है,कि अपने परम्परागत अनाजों का महत्व को लोग जाने और इसका ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करके स्वावलंबी बनें।

LEAVE A REPLY