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कोरोना और पर्यावरण : कोरोना अगर मानव जाति के लिए घातक तो पर्यावरण के लिए वरदान से कम भी नहीं

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राकेश डंडरियाल
नई दिल्ली : आज देशव्यापी लॉकडाउन के नौ दिन हो गए हैं। ये नौ दिन हमें कई सबक देकर भी गए हैं। एक तरफ जहाँ जनता घरो के अंदर बंद हैं, तो दूसरी तरफ शुद्ध बातावरण , शुद्ध हवा , नीला आसमान , कम प्रदुषण , ध्वनि प्रदुषण  में कमी से भी आप खुश होंगे। नौ दिनों के लॉकडाउन का सबसे बड़ा फायदा अगर किसी को हुआ हैं तो वो हैं पर्यावरण। राजधानी दिल्ली की ही बात करें तो शहर की हवा 10 गुना साफ हुई है।भारत समेत चीन, अमेरिका, इटली, स्पेन और यूके के कई प्रमुख शहरों में जहरीली गैस का उत्सर्जन थमने से वायु गुणवत्ता बेहतर हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस के लिए लागू किए गए लॉक डाउन की वजह से कामकाज बंद किए जाने से देश में प्रदूषण के स्तर में खासी कमी आई है। आसमान नीला दिखाई दे रहा है। हवा अपेक्षाकृत शुद्ध है।विकास की अमानवीय गतिबिधियो के बंद हो जाने से इसका सीधा असर प्रकृति पर दिखाई दे रहा हैं।

गंगा

दुनियाभर में लॉकडाउन के अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं , भारत का ही जिक्र कर लीजिये , लॉकडाउन का सबसे ज्यादा अच्छा असर देश की बड़ी नदी गंगा पर देखने को मिल रहा है क्योँकि की आजकल गंगा में औद्योगिक कचरा नहीं पढ़ रहा है। रियल टाइम वॉटर मॉनिटरिंग में गंगा नदी का पानी 36 मॉनिटरिंग सेंटरों में से 27 में नहाने के लिए उपयुक्त पाया गया है।

शहरों में शुद्ध हवा

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च के अनुसार, कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण दिल्ली में पीएम 2.5 में 30 फीसद की गिरावट आई है। अहमदाबाद और पुणे में इसमें 15 फीसद की कमी आई है।नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) प्रदूषण का स्तर, भी कम हो गया है। एनओएक्स प्रदूषण मुख्य रूप से ज्यादा वाहनों के चलने से होता है। एनओएक्स प्रदूषण में पुणे में 43 फीसद, मुंबई में 38 फीसद और अहमदाबाद में 50 फीसद की कमी आई है।

स्थिर धरती
डेली मेल के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से हमारी धरती अब स्थिर हो गई है। अब वह उतना नहीं कांपती, जितना लॉकडाउन से पहले कांपती थी। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि इस समय जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन है। हमारी धरती का कंपन कम हो गया है. यानी पूरी दुनिया में ध्वनि प्रदूषण इतना कम हो गया है कि अब भूकंप विज्ञानी बेहद छोटे स्तर के भूकंपों को भी भांप ले रहे हैं।. जबकि, लॉकडाउन से पहले ऐसा करने में मुश्किल आती थी।गाड़ियों का, फैक्ट्रियों का, हॉर्न, तोड़फोड़ और निर्माण आदि से निकलने वाली आवाजें धरती के कंपन को बढ़ा देती हैं।इन सब के बंद होने इस धरती में कम्पन कम हुई।

जंगली जानवर

लॉकडाउन के मध्यनजर लोग घरो के अंदर दुबके हैं लेकिन ऐसे में सुनसान सड़कों पर अब लोग नहीं बल्कि जानवर घूमते हुए नजर आ रहे हैं। कहीं सड़कों पर नीलगाय तो कहीं सड़कों पर हिरन घूम रहे हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार और देहरादून में तो दोपहर में हे हाथी घूम रहे है।

ओजोन परत
एक अध्ययन में पता चलता है कि अटलांटिक के ऊपर ओजोन परत में छेद की हीलिंग तेजी से हो रही है। सीएफसी और अन्य हानिकारक प्रदूषकों से ओजोन परत को भारी नुकसान पहुंचा था और उसमें बड़ा होल हो गया था। जिसको लेकर पूरी दुनिया चिंतित थी लेकिन पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से में स्थित अटलांटिक के ऊपर बने ओजोन लेयर का छेद अब भर रहा है।

कार्बन उत्सर्जन

दुनिया भर में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और मानवीय गतिविधियो के कम होने से कुछ ही दिनों में पूरे विश्व में कार्बन उत्सर्जन इस साल इतना कम हो गया है जितना 75 साल पहले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ था। 2008 के ग्लोबल रिसेशन के बाद 1.4 फीसद कार्बन उत्सर्जन में कमी आई थी जो अब पांच फीसद तक कम हो सकती है।

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