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कोरोना की जंग में वेंटिलेटर की भूमिका अहम् : अमेरिका के अलावा सभी का हाल एक जैसा

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Medical ventilators on store exhibition

पूरी दुनिया को कोरोना से लड़ने के लिए लगभग 880,000 नए वेंटिलेटर्स की जरुरत है ।

राकेश डंडरियाल

नई दिल्ली : कोरोना के संक्रमित मरीजों के इलाज में वेंटिलेटर की सबसे अहम भूमिका होती है। सांस लेने में तकलीफ होने पर वेंटिलेटर का ही सहारा होता है। दुनियाभर में वेंटिलेटर बनाने वाली चार-पांच ही बड़ी कंपनियां हैं। इस वक्त इनके पास भी वेंटिलेटर बनाने की इतनी क्षमता नहीं रह गई है, क्योंकि दुनिया के कई बड़े देश बड़ी संख्या में आर्डर दे रहे हैं और सभी को जल्द से जल्द चाहिए। एक नजर में आपको बताते है आखिर कितनी कमी हैं दुनिया भर में वेंटिलेटरों की। पूरी दुनिया को कोरोना से लड़ने के लिए लगभग 880,000 नए वेंटिलेटर्स की जरुरत है ।

भारत में वेंटिलेटरों की कमी
भारत को अगले एक महीने के अंदर अतिरिक्त 50 हजार वेंटिलेटर और अस्पतालों में 2 लाख से ज्यादा बेड की जरूरत पड़ सकती है। देश में अभी 55 हजार वेंटिलेटर ही हैं।और लगभग 100,000 आईसीयू बेड ।सरकारी अस्पतालों में 8,432 वेंटिलेटर्स हैं ।
सरकार ने 47 हजार वेंटिलेटर का ऑर्डर दिया है।

भारत में वेंटिलेटर्स की शुरुआती कीमत 1.5 लाख से लेकर अधिकतम कीमत 5 लाख तक है।
ये कंपनियां बनाती हैं वेंटीलेटर : मारुति, महिंद्रा, कल्याणी, टाटा मोटर्स, हुंडई,स्कान-रे ,आग्वा कंपनी।
भारत अपनी जीडीपी का लगभग 3.5% स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च करता है।

बिकसित देशो का हाल

जर्मनी के पास फिलहाल 25 हजार वेंटिलेटर्स हैं इसके अलावा 10 हजार नए वेंटीलेटर खरीद रहा हैं ।
इटली के पास 3000 वेंटिलेटर्स है , 5000 वेंटिलेटर्स के नए आर्डर दिए गए हैं।
फ्रांस के पास पांच हजार वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं।

इंग्लैंड के पास अभी 8 हजार वेंटिलेटर हैं , 10 हजार नए आर्डर दिए गए है , इंग्लैंड को कुल 30 हज़ार वेंटिलेटर्स की जरुरत हैं ।

अमेरिका में लगभग एक लाख साठ हजार से लेकर एक लाख 72 हजार वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं।
जापान के पास लगभग 45 हज़ार वेंटिलेटर्स हैं।
रूस के पास भी लगभग 40 हज़ार वेंटिलेटर्स हैं।

पाकिस्तान की हालत भी बुरी हैं उसके पास सिर्फ 2200 वेंटिलेटर्स हैं , पाकिस्तान 3000 नए वेंटिलेटर्स खरीद रहा हैं।

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