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कोरोना वाइरस के बीच समझिए प्राकृतिक सब्जियों – तिमला,जंगली तैड़ू,क्विराल, सेमल की सब्जी का महत्व

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दिलवर सिंह बिष्ट
रुद्रप्रयाग।चकाचौंध भरी दुनिया ने शायद ही इस बात की कल्पना की होगी कि आने वाला समय कैसा होगा । आज समाज को खानपान में रेडीमेड तैयार भोजन की लत पद गई हैं । उन्हें क्या पता था कि प्रकृति के आगे सबको नतमस्तक होना पड़ेगा, और फिर वही अपनी पौराणिक रीतिरिवाजों और खानपान की ओर लालायित होना पड़ेगा । शहरों में तो शायद नहीं, लेकिन कोरोना वायरस ने पहाड़ (उत्तराखंड )के लोगों को तो प्रकृति से रु बरु करा दिया है, और आख़िरकार उन्हें कंद मूल फल की अहमियत व स्वाद की ओर ला ही दिया है।

गढ़वाल -कुमाऊं में आदि काल से ही प्रकृति ने मानव के लिए नाना प्रकार की जड़ी बूटियां , साग सब्जियां बिना मेहनत के ही उपभोग के लिए दी हैं। लेकिन बाजारी चकाचौंध ने पहाड़ के लोगों को रेडीमेट तैयार भोजन बर्गर,पिज्जा मैगी,कुरकुरे, कई तरह के पेय पदार्थों ने घर-घर में अपना एक सिक्का जमा दिया था। कोरोना वाइरस की वजह से नई पीढ़ी के मुंह लगे रेडीमेड भोजन का स्वाद छूट गया हैं, और अब उन्होंने पहाड़ो में रहकर प्रकृति द्वारा दी गई अनमोल एवं कुदरती फल सब्जियों को खाने और उन्हें समझने का अहसास किया हैं ।

आजकल कोरोना वाइरस की वजह से लॉकडाउन है.,और जनता घरों में बंद हैं। उन्हें बाजारू रेडीमेट मिलने वाली खानपान की बस्तुओं से दो चार होना पड़ रहा है । बाजारों से आ रही सब्जी खाने से भी लोग डर रहे हैं । अब उन्होंने अपने पूर्वजों द्वारा बताई व इस्तेमाल की गई सब्जियों की तलाश करना शुरू कर दिया है , कई ने तो उसका स्वाद भी लेना शुरू कर दिया है।

हिमालयी क्षेत्र में आजकल प्रकृति ने बिना मेहनत के ही वृक्षों पर बिभिन्न प्रकार सब्जियों का भंडार भरा पड़ा हैं जिनमें क्विराल, तिमला , व जमीन के अंदर उगने वाला जंगली तैड़ू के फल, सेमल के फल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं , जिन्हे निकाल कर इसकी सब्जी बनाकर इसकी पोष्टिकता का आनंद लिया जा सकता हैं। इसके अलावा बाज़ार में उपलब्ध पेय पदार्थों को छोड़ घर मे आंवले,बुराँश के जूस का सेवन कर उसके महत्व को भी समझने लगे हैं।

शोध कर्ता कमल सिंह बिष्ट,प्रवीन सिंह असवाल का कहना है कि यह सच है कि नई पीढ़ी ने खानपान में रेडीमेट भोजन,वस्तुओं को तरजीह दी है, जिससे मुंह का स्वाद जाता रहां हैं , लेकिन जब से कोरोना वायरस की बीमारी आई हैं और पूरे देश में लॉकडाउन है पहाड़ो में जनता अपने घरों में पूर्वजों द्वारा प्रकृति द्वारा दी गई क्विराल आंवला,बुराँश,तिमला व तैड़ू की सब्जी व घरेलू पेय पदार्थ का स्वादिष्ट पन का आनंद ले रहे हैं , ये सभी सब्जियां शरीर के लिए औषधि का कार्य भी करती है, इनमे औषधि के गुण भी पाए जाते हैं। बिष्ट का कहना हैं कि हमें अपने घरेलू खानपान पर जोर देना चाहिए , न कि रेडीमेट बजारु खानपान में शुद्ध प्राकर्तिक लवणों से युक्त ये सारी सब्जियां हमारे शारारिक विकास के लिए भी जरुरी हैं साथ ही रोगों से लड़ने में भी रोगों सक्षम हैं ।

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