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गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए कितने संतो की जान लेने के बाद जागेगी सरकार?

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New Doc 2019-04-21

अब स्वामी आत्मबोधानंद ने लिखी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी- कहा “जान देने के अलावा विकल्प नहीं छोड़ा” 180 दिनों से थे अनशन पर , अब 27 अप्रैल से पानी भी छोड़ने का एलान।

हरिद्वार : 26 साल के संत आत्माबोधानंद स्वच्छ गंगा के लिए 180 दिनों से अनशन पर बैठे हैं। अब संत आत्माबोधानंद ने गंगा की सफाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को एक चिट्ठी लिखी है। जिसमें उन्होंने लिखा हैं कि उनके सामने जल त्यागने के अलावा अब कोई विकल्प नहीं है।उनसे पहले भी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई पत्र लिखे थे। लेकिन नतीजा सिफर रहा था । संत आत्माबोधानंद  पिछले 180 दिनों से अनशन पर बैठे है। केरल के रहने वाले इस संत में अब गंगा सफाई की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होती देख कर जल त्यागने का फैसला किया है। संत आत्माबोधानंद ने इस संबंध में पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। पत्र में संत ने लिखा हैं , ‘मैंने गंगा की सफाई की सभी उम्मीद छोड़ दी है और इस पवित्र नदी के लिए अपनी जान देने में मुझे कोई डर नहीं है।’
संत आत्माबोधानंद ने कहा कि उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को पत्र लिखा है। संत का कहना है कि वह भले ही स्वच्छ गंगा के लिए अनशन कर रहे हैं लेकिन न तो केंद्र सरकार और ना ही राज्य सरकार ने गंगा की सफाई को लेकर उनकी मांगों पर ध्यान दिया है।

स्वच्छ गंगा को लेकर स्वामी आत्मबोधानंद की 11 मांगे

पत्र में स्वामी आत्मबोधानंद ने लिखा है कि आपकी गंगा को साफ नहीं करने की मंशा के कारण 27 अप्रैल से जल त्यागकर अपनी जान देने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

पत्र में गंगा और उसकी सभी सहायक नदियों (भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर और धौलीगंगा) पर बने मौजूदा बांधों और प्रस्तावित परियोजनाओं को रद्द करने को कहा है।

गंगा के मैदानी इलाकों (विशेषकर हरिद्वार में) खनन और वनों को काटने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

नदी के संरक्षण के लिए गंगा एक्ट को लागू करने व स्वायत्त गंगा भक्त परिषद् का गठन करने की भी मांग शामिल है।

सरकार ने स्व. जीडी अग्रवाल जी से वादा किया था कि प्रस्तावित जल बिजली परियोजना का निर्माण नहीं किया जाए और खनन पर भी रोक लगेगी। लेकिन हरिद्वार में स्थिति बिल्कुल ही अलग है।

गंगा के ऊपरी क्षेत्र में वन कटान प्रतिबंधित किया जाए ।

गौरतलब हैं की जुलाई 2015 में केंद्र की सरकार ने स्वच्छ गंगा मिशन के लिए 20 , 000 करोड़ का बजट पास किया था जिसमे से अब तक केवल Rs 6,211.27 cores हे क्लीन गंगा मिशन के लिए जारी हुआ हैं , तो गंगा साफ़ तो होने से रहीं , हाँ संत जरूर साफ़ हो रहे हैं ।

मातृसदन संस्था गंगा
वर्ष 1998 में कनखल थाना क्षेत्र के जगजीतपुर गांव में गंगा के किनारे स्थापित की गई मातृसदन संस्था गंगा के लिए बलिदान करने वालों की भूमि बन गई है।

वर्ष 2003 में आश्रम में स्वामी गोकुलानंद नैनीताल जनपद के एक गांव के पास जंगल में मृत अवस्था में पड़े मिले थे।

13 जून 2011 : 78 दिनों तक गंगा में खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर अनशन करते हुए ब्रह्मचारी निगमानंद सरस्वती का देहरादून स्थित जौलीग्रांट अस्पताल में देहांत हो गया था।

11 अक्टूबर 2018 : गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का (11 अक्टूबर) को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में निधन हो गया. स्वामी सानंद को हरिद्वार प्रशासन ने जबरदस्ती एम्स में भर्ती कराया था।स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने 112 दिन तक अनशन करते हुए खुद को गंगा के प्रति समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने संघर्ष के लिए मातृसदन का ही परिसर चुना और यहां के संघर्ष और बलिदान की परंपरा को आगे बढ़ाया।और अब संत आत्माबोधानंद इस अविरल भगीरथ प्रतिज्ञा को आगे बढ़ा रहे हैं ।

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