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गंगा की अविरलता के लिए होली के दिन शुरू हुआ शिवानंद सरस्वती का अनशन

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राकेश चंद्र डंडरियाल

हरिद्वार।। मातृसदन के शिवानंद सरस्वती ने मंगलवार को गंगा रक्षा के लिए अपनी तपस्या शुरू कर दिया हैं ।शिवानंद सरस्वती के अनशन से पहले ब्रह्मचारी संत आत्मबोधानंद ने अपने अनशन को विराम दिया। मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने भरत झुनझुनवाला व श्रीमती मधु झुनझुनवाला के हाथों इलेक्ट्रोल पीकर तपस्या को विराम दिया। शिवानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार व राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि आखिर हर बार सरकार वादा करके क्यों मुकर जाती हैं , क्यों सरकार मातृसदन की पीछे पडी हैं।

मातृसदन आश्रम में मंगलवार से परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने गंगा रक्षा को लेकर अपनी तपस्या शूरू कर दी हैं । उन्होंने कहा कि पूर्व प्रोफेसर ज्ञान स्वरूप सानंद के गंगा रक्षा संकल्प को पूरा कराने के लिए वह तपस्या शूरू कर रहे हैं। इस दौरान वे एक दिन में बिना नींबू, नमक और शहद वाला केवल पांच गिलास पानी लेंगे। धीरे-धीरे इस पानी की मात्रा भी कम करके चम्मच कर देंगे।

अंत में जल भी त्याग करके अपनी आत्मा को परम तत्व में विलीन कर पूर्व प्रोफेसर ज्ञान स्वरूप सानंद, ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद और ब्रह्मचारिणी पद्मावती के संकल्प को बल देने का प्रयास करेंगे।

इससे पहले ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद दिल्ली एम्स में भर्ती, गंगा रक्षा को 30 जनवरी से कर रहे थे।

क्या हैं शिवानंद सरस्वती छह सूत्रीय मांगें

गंगा पर निर्माणाधीन और प्रस्तावित सभी बांधों को निरस्त किया जाए।

गंगा पर बने चुके बांधों से गंगा में प्राकृतिक प्रवाह को दुरूस्त रखने के लिए ई-फ्लो की ठोस व्यवस्था बनाई जाए, हरिद्वार भी इसमें शामिल हो।

गंगा में खनन से संबंधित एनजीटी के आदेशों का अक्षरश: पालन करने को नोटिफिकेशन जारी हो।

गंगा एक्ट के लिए सरकार के स्तर पर राष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत चर्चा जिसमें मातृसदन और अन्य गंगा प्रेमियों को भी शामिल किया जाए।

एनजीटी के जज राघवेंद्र राठौर को गंगाद्रोही घोषित कर उन्हें निलंबित कर मातृसदन की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की जाए।

हरिद्वार एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस को निलंबित कर उनकी जांच की जाए।

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