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गंगा- यमुना : जो काम करोड़ों में नहीं हो सका, उसे लॉकडाउन ने कर दिखाया

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राकेश डंडरियाल

नई दिल्‍ली। भारत में 25 मार्च से तीन सप्ताह का पूर्ण लॉकडाउन लागू है। अभी 12 दिन ही गुजरे हैं लेकिन , हवा में शुद्धता , नदियों में प्रदूषण में कमी साफ़ झलक रही हैं। जिस गंगा को चार – चार प्रधानमंत्री 34 साल में साफ़ नहीं कर पाए उसे 12 दिनों के लॉकडाउन ने कर दिखाया ।जिस काम को शीला दीक्षित 15 सालों में और अरविन्द केजरीवाल पांच साल में नहीं कर पाए उसे चरितार्थ कर दिया लॉकडाउन ने। एक ने दिल्ली में यमुना को साफ करने की गारंटी दी हैं तो दूसरे ने गंगा को माँ व इसकी सफाई के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्राबधान किया था , मगर पिछ्ले पांच साल में दोनों जलसे के अलावा कुछ नहीं कर सके ।

दरअसल कोरोना वायरस से लड़ने के लिए देश भर में लगाए गए 21 दिनों के लॉकडाउन ने वो कर दिखाया हैं, जिसे देश के चार – चार प्रधानमंत्री , दो – दो मुख्यमंत्री नहीं कर पाए। पहले बात करते हैं गंगा की, जीवनदायिनी गंगा में लॉकडाउन का असर साफ़ दिखाई दे रहा है, और प्रदुषण के स्तर में खासी कमी आई है। लॉकडाउन के कारण इन दिनों औद्योगिक कचरा गंगा में नहीं आ रहा है।आस्था की प्रतीक गंगा उत्तराखंड के गौमुख से लेकर गंगासागर तक निर्मल हुई हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हाल ही में जो आंकड़े जारी किये गए हैं वे बताते हैं कि काशी में अस्सी से वरुणा संगम के बीच भी गंगाजल की गुणवत्ता में 30 से 35 फीसदी तक इजाफा हुआ है। इस सबसे प्रमुख कारण कल-कारखानों के साथ घाटों पर स्नान और अन्य गतिविधियों का बंद होना है। गंगाजल में फिक्कल कोलीफार्म की मात्रा का स्तर प्रति सौ एमएल में 15 हजार से घट कर 11 हजार तक आ गई है जबकि पीएच का स्तर 3.5 से अधिक हो गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रीयल टाइम वॉटर मॉनिटरिंग रिपोर्ट बताती हैं कि गंगा के पूरे प्रवाह पथ में 36 स्थानों पर मॉनीटरिंग सेंटर बने हैं। उनमें 27 स्थानों पर गंगाजल पूर्ण रूप से नहाने के योग्य हो गया है। लॉकडाउन के पहले सिर्फ छह स्थानों पर ही गंगाजल नहाने लायक था।

औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से यमुना भी हुई साफ़

दिल्ली में जीवनदायिनी कही जाने वाली यमुना को भी नई सांस मिली है। जिस पानी में बदबू आती थी अब उसी यमुना का पानी बिल्कुल साफ दिखाई दे रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि उन्होंने सोचा भी नहीं था कि दिल्ली में ऐसी स्वच्छ यमुना दिखाई देगी। लॉकडाउन के कारण औद्योगिक प्रतिष्ठानों का बंद होना है। औद्योगिक इकाइयां बंद होने से यमुना में औद्योगिक कचरा गिरना बंद हो गया है। हालाँकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यमुना से पानी के कुछ सैंपल उठाने की बात की हैं जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि यमुना के पानी की गुणवत्ता कितनी अच्छी हुई है।यमुना की सफाई पर पिछ्ले 26 वर्षों में लगभग 1514 करोड़ रुप खर्च हुए हैं लेकिन नतीजा ज़ीरो ही रहा हैं। अब लॉकडाउन गंगा – यमुना के लिए एक नया सन्देश लेकर आया है ,कि अगर इन्हे साफ़ रखना हैं तो लॉकडाउन भी एक जरिया है। जिससे आप नदियों में होनेवाले प्रदुषण से निपट सकते हैं।

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