Home LIFE OF A SINGHER गुमनामी और बेबसी की जिंदगी जीता एक गायक , गजलों का नायक...

गुमनामी और बेबसी की जिंदगी जीता एक गायक , गजलों का नायक , व चुटकलों का बादशाह

325
0

सुनिए संतोष सिंह रावत का केदारनाथ घटना पर गया एक गाना

दिलबर सिंह बिष्ट

रुद्रप्रयाग। दुनिया मे कुछ लोग ही ऐसे विरले होते है जो कुछ न होते हुए भी बहुत कुछ लोगों के जीवन को अपनी लेखनी के माध्यम से जीने की राह पर चलना सिखाते है। कुछ लोग दूसरों के लिये मिसाल बनना चाहते है, लेकिन बेरोजगारी और बेबसी उन्हें पीछे धकेल देती हैं , फलस्वरूप उन्हें या तो मज़बूरी में जी हुजूरी करनी पड़ती हैं ,या अपने वसूलों से समझौता करना पड़ता हैं।

आज हम ऐसे ही एक सख्श का जिक्र कर रहे हैं जिन्होंने ने अपनी लेखनी के बल पर बहुत कुछ किया लेकिन , इसे उनका सौभाग्य कहे या समय का फेर , आज हम बात कर रहे हैं एक प्रतिभावान गायक सन्तोष सिंह रावत की, मूल रूप से सिला बामन गाँव पोस्ट पठालीधार ब्लॉक अगस्त्य मुनि निवासी सन्तोष सिंह रावत पुत्र स्व श्री यशपाल सिंह रावत की जो कक्षा 10 वी पास हैं और अब तक हजारों हिंदीके गाने ,गढ़वाली गाने ,चुटकुले व गजल लिख चुके है ।

सन्तोष सिंह ने केदारनाथ आपदा की त्रासदी के दौरान पीडितों पर भोले से नाराजगी भरा एक गीत भी लिखा,इस गाने को वे अपने स्वरों के माध्यम से स्वरबद्ध कर एलबम बनाना चाह रहे है, लेकिन आर्थिक तंगी उनके सबसे बड़ी मज़बूरी हैं , जिसके चलते चलते यह अधर में है ।

KEDARNATH

केदारनाथ की आपदा पर बन रही फिल्मों पर वे कई बार उनके लिखे गाने को लेकर इन फिल्मों के डायरेक्टर्स को मिल चुके हैं , लेकिन उन्होंने दूसरे दिन आने को कहकर टाल ताल दिया जाता हैं । सन्तोष का कहना है कि अपने लिखे चुटकलों , गाने व गजलों को छपवाने के लिए लोक निर्माण विभाग में ठेकेदारी प्रथा के दौरान कुछ दिन नौकरी भी करनी पड़ी,और कुछ दिन बाद नौकरी छूट गई ।

नौकरी जाने के बाद संतोष ने छोटी सी दुकान खोली लेकिन बीमारी ने उन्हें वहां भी नहीं छोड़ा ,आर्थिक तंगी,बेरोजगारी के चलते उन्हें विजय नगर की दुकान को बेचने को मजबूर होना पड़ा । आज 37 बर्ष के हो चुके सन्तोष को आज भी आशा हैं कि उनकी लिखी गजलों , चुटकलों व गीतों को उनकी हसरतों के मुताबिक पंख लग पाएंगे ।

LEAVE A REPLY