Home Ghes Intermediate college running without Teacher चमोली: घेस राजकीय इंटर कालेज का हाल , बिन शिक्षक छात्र बेहाल

चमोली: घेस राजकीय इंटर कालेज का हाल , बिन शिक्षक छात्र बेहाल

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सुभाष पिमोली

चमोली : उत्तराखंड की तमाम सरकारों ने भले ही उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लाख दावे किए हो, लेकिन हकीकत ये है कि पहाड़ो के कई विद्यालय सरकारों के इन दावों की पोल खोल रहे हैं। सब पढ़े सब बढ़े के नारों के साथ सरकार ने जहां कदम- कदम पर विद्यालय तो खुलवा दिए, वहीं इन विद्यालयों में शिक्षा देने वाले शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। पहाड़ी जनपदों में अधिकांश विद्यालय ऐसे भी हैं जहां लंबे समय से कई महत्वपूर्ण विषयों के विषयाध्यापकों की लगातार कमी बनी हुई है। कुछ इसी तरह शिक्षकों की कमी बनी हुई है चमोली के दूरस्थ गांव घेस के राजकीय इंटर कालेज में ,क्या है घेस में शिक्षा व्यवस्था का हाल देखिए हमारी इस खास रिपोर्ट :

घेस का राजकीय हाई स्कूल पिछली सरकार ने यहां की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसका उच्चीकरण कर इसे 2016 में राजकीय इंटर कालेज तो बना दिया लेकिन सरकार शायद ये भूल गयी कि यहां जो छात्र छात्राएं यहाँ प्रवेश लेंगे उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भी जरूरत होती है। विद्यालय में इंटरमीडिएट स्तर पर केवल कला संकाय की ही कक्षाएं संचालित होती हैं, विज्ञान वर्ग के छात्रों को आज भी अपनी शिक्षा दीक्षा के लिए गांव छोड़ शहर का रुख करना पड़ता है।

घेस का हाल यह है कि इंटरमीडिएट की कक्षाओं में केवल हिंदी विषय मे ही विषयाध्यापक की नियुक्ति है, अन्य सभी विषय छात्र छात्राओं को स्वयं ही पढ़ने होते हैं विद्यालय में लेक्चरर के 4 पद सहायक अध्यापक , इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी में एक पद ,और यहां तक कि विद्यालय में स्थायी प्रधानाचार्य का पद भी लंबे समय से रिक्त चल रहा है।

इंटरमीडिएट में भूगोल, इतिहास, संस्कृत,अंग्रेजी ,जैसे महत्वपूर्ण विषयों में विषयाध्यापकों की कमी के चलते शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है , ऐसे में भला कैसे छात्रों का भविष्य सुधरेगा ये कहना कठिन है। शिक्षकों की कमी के चलते इन छात्रों के परीक्षाफल पर कितना प्रभाव पड़ता होगा ये हम और आप तो बखूबी समझते हैं लेकिन शायद सूबे की सरकार को इन छात्रों के भविष्य की कोई परवाह नही ,शिक्षकों की कमी से जूझ रहे इस विद्यालय में लगातार छात्र संख्या घटती जा रही है। आर्थिक रूप से संम्पन्न अभिभावक अपने बच्चो के भविष्य और बेहतर शिक्षा की खातिर पलायन करते जा रहे हैं।

विद्यालय में अब छात्रों की संख्या 150 से भी कम रह गयी है , विद्यालय प्रबंधन ने पीटीए के माध्यम से भी यहां शिक्षकों की व्यवस्था करने पर विचार किया लेकिन अभिभावकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ और दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र होने की वजह से ये व्यवस्था भी मुकाम हासिल न कर सकी। यहां पढ़ने वाले छात्र बताते हैं कि बिना विषयाध्यापकों के उन्हें पठन पाठन में कठिनाई होती है ,जिसका प्रतिकूल प्रभाव उनके वार्षिक परीक्षाफल पर भी पड़ता है

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