Home EDUCATION जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में रैगिंग का मामला सामने आया

जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में रैगिंग का मामला सामने आया

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विश्वविद्यालय प्रशासन कर रहा है मामले को दबाने की कोशिस

पंतनगर : देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयो में सुमार जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जूनियर छात्रों के साथ उनके सीनियर छात्रों द्वारा रैगिंग करने का मामला सामने आया है। लेकिन विश्वविद्यालय हैं कि पीड़ित छात्रों की शिकायत को दबाने पर लगा हुआ हैं। पीड़ित छात्रों ने कुलपति एवं छात्र कल्याण से शिकायत की तो दो वार्डनों को हटा दिया गया है, लेकिन दोषी छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं गई।

मामले को लगभग एक महीना बीत गया हैं , विश्वविद्यालय कोशिश कर रहा हैं कि मामले को किसी तरह से रफा दफा कर दिया जाय ।पीड़ित छात्रों के अनुसार 12 अक्तूबर को चितरंजन भवन-1 छात्रावास में एनएसएस कैंप लगाया गया था ।
नाम न छापने की शर्त पर पीड़ित छात्रों ने बताया कि नेहरू भवन के अंतवासी कृषि स्नातक में प्रथम वर्ष के आठ-दस फ्रेशर्स छात्रों की उन्हीं के सीनियरों ने रोककर रैगिंग की। इस दौरान जूनियर छात्रों को पैंट उतरवा दी गई और परेड करने के लिए मजबूर किया गया। सीनियरों ने जूनियर छात्रों को दुबारा शाम को नेहरू भवन के वाईएलएन-1 कक्ष में बुलाया और कमरा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद सभी के कपड़े उतरवाकर एक घंटे तक उनके साथ बदसलूकी की गई।

छात्रों ने इसकी सूचना परिजनों को दी और उनकी सलाह पर छात्रों और परिजनों ने मामले की शिकायत छात्र कल्याण सहित कुलपति से भी की । शिकायत मिलने पर 21 अक्तूबर को विश्वविद्यालय अनुशासन समिति (यूडीसी) की बैठक हुई जिसमें छात्रों ने अपने साथ हुई आपबीती सुनाई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने कार्रवाई करते हुए नेहरू एवं चितरंजन भवन-1 के वार्डनों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया । लेकिन दोषी छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की बताया जा रहा हैं कि सीनियर छात्र रसूखदार परिवारों से है।

डीन छात्र कल्याण डॉ सलिल तिवारी के अनुसार मामले के दोषी चार छात्रों पर एक हजार रुपये प्रति छात्र जुर्माना लगाने सहित भविष्य में ऐसी कोई हरकत न करने का लिखित माफीनामा लेते हुए दोनों वार्डन को हटा दिया गया है।

इधर जब राजसत्ता न्यूज़ ने विश्वविद्यालय की डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ अंजलि चौधरी से इस मामले में बात की तो उन्होंने साफ़ कहा कि उनके विश्वविद्यालय में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई।

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