Home Uncategorized तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ जी के कपाट खुले।

तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ जी के कपाट खुले।

137
0


बुधवार 11.30 बजे अश्विनी नक्षत्र में खुले भगवान तुंगनाथ के कपाट।


सतेन्द्र सिंह बिष्ट
रुद्रप्रयाग/उखीमठ।पंच केदारों में एक तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बुधवार 11बज कर 30 मिनट पर ज्येष्ठ माह अश्विनी नक्षत्र, त्रयोदशी तिथि में विधि-विधान के साथ खोल दिये गए । कपाट खुलने से पूर्व श्री तुंगनाथ की उत्सव डोली प्रातः 9 बजे चोपता से तुंगनाथ पहुंची। उत्सव डोली 18 मई को शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ से रवाना हुई थी। प्रात:10.30 बजे से कपाट खुलने हेतु द्वार पूजन एवं भैरवनाथ जी का आवह्वान किया गया। दिन में 11.30 बजे तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट खोल दिये गये।
तृतीय केदार भगवान श्री तुंगनाथ का मंदिर समुद्र तल से 12070 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं।यह सभी मंदिरों से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। इस अवसर पर सामाजिक दूरी का पूर्ण रूप से पालन किया गया।देवस्थानम बोर्ड, हक हकूकधारी एवं प्रशासन के चुनिंदा प्रतिनिधि इस अवसर पर मौजूद रहे।


कपाट खुलने के पश्चात बाबा की समाधि पूजा, रूद्राभिषेक एवं जलाभिषेक किया गया। तथा जन कल्याण की कामना की गयी‌। बाबा तुंगनाथ मंदिर में भगवान तुंगनाथ का प्रथम रूद्राभिषेक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से संपन्न किया जा रहा है।इस अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के सुपरवाइजर यदुवीर पुष्पवान, तहसीलदार जयबीर राम बधाणी, मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी एवं प्रबंधक प्रकाश पुरोहित मौजूद रहे।
तृतीय भगवान श्री तुंगनाथ के कपाट खुलने के साथ ही अब उत्तराखंड के चारों धामों सहित पंच बदरी एवं पंच केदार के कपाट ग्रीष्मकाल हेतु खुल गए है। कोरोना महामारी के चलते चारधाम यात्रा शुरू नहीं की गयी है।


उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा.मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि उत्तराखंड के चार धामों में श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 15 मई, श्री केदारनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल तथा श्री गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट 26 अप्रैल को खुल गये है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट 11 मई तथा चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट 18 मई को खुल गये और अब तृतीय केदार भगवान श्री तुंगनाथ के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड के सभी धार्मिक मठ-मंदिरों के कपाट खुल चुके है। तथा सभी मंदिरों में रावल तथा पुजारियों द्वारा शासन स्तर पर दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की जा रही है।

LEAVE A REPLY