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धारचूला में फसे नेपाली मजदूरों की कहानी, पुल और नदी के बीच जूझती जिंदगी का लाइव दृश्य

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राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

काली नदी में कूदे 4 नेपाली युवक तीन पहुंचे अपने देश, एक वापस

पिथौरागढ़/धारचूला : .उत्तराखंड में कोरोना वायरस लॉकडाउन के बाद नेपाल मूल के मजदूरों की संख्या काली नदी के इस पार लगातार बढ़ रही हैँ। मजदूरों को ना तो नेपाल ही अपने यहाँ रखने को राजी हैँ और न ही उत्तराखंड , व भारत सरकार। सीमान्त जिले पिथौरागढ़ के बॉर्डर पर स्वदेश लौटने के लिए नेपाली मजदूर अपनी जिंदगी तक को दाँव पर लगा रहे हैं।

दरअसल धारचूला में बीते 6 दिनों से लगातार सैकड़ों नेपाली मजदूर इकट्ठा हो रहे हैँ, और नेपाल जाना चाहते हैँ , लेकिन नेपाल सरकार है कि पुल नहीं खोलने की जिद पर अड़ी है , जिस कारण इन मजदूरों की स्वदेश वापसी नहीं हो पा रही है। परेशांन और मजबूर चार नेपालियों ने नेपाली अब दोनों मुल्कों को बांटने वाली काली नदी में छलांग लगाना शुरू कर दिया हैँ कल 4 लोगों मेंसे 3 तैरकर वतन वापसी में सफल रहे, जबकि 1 नेपाली नागरिक को थक-हारकर वापस भारत लौटना पड़ा।

900 नेपाली मजदूर धारचूला में जमा हो गए हैं
नेपाल से भारत में आए ये मजदूर अपनी सरकार से इस कदर नाराज है कि इन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ ही जोरदार प्रदर्शन भी किया है। नेपालियों का कहना है कि उनकी सरकार भारत में फंसे नेपालियों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है, जैसे वो विदेशी हों. धारचूला में अलग-अलग जिलों से करीब 900 नेपाली मजदूर जमा हो गए हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

नेपाल की आनाकानी
उत्तराखंड प्रशासन इस बारे में नेपाल के अधिकारियों से कई बार अपने नागरिकों को ले जाने की मांग कर चुका है, लेकिन नेपाली अधिकारी लॉकडाउन का बहाना बना रहे हैं. नेपाल ने पहले 31 मार्च तक बॉर्डर सील किया था, लेकिन अब इसकी अवधि बढ़ाकर 7 अप्रैल तक दिया गया है।इधर पिथौरागढ़ प्रशासन ने बताया हैँ कि नेपाली नागरिकों के रहने-खाने का पूरा इंतजाम किया गया है, मजदूरों को अलग-अलग ग्रुप में रखा जा रहा है.

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