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नंदा देवी की उर्गम घाटी में आज्ञात बीमारी से जंगली हिरनों का मरना जारी

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नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के वन क्षेत्राधिकारी धीरेश चंद्र बिष्ट ने कहा कि सात सदस्यीय टीम कर रही हैं जांच

सुभाष पिमोली
जोशीमठ/थराली।नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत जैव विविधता के लिए विख्यात सीमांत जिला चमोली के उर्गम घाटी क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से जंगली हिरनों का बड़ी संख्या में मरना जारी हैं । इन हिरनो में क्या बीमारी है? और क्यों क्यो मर रहे है? इतनी बड़ी संख्या में ये हिरन , इस पर अभी संशय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क की 7 सदस्यीय टीम ने इलाके में पहुंच गई हैं , और जाँच शुरू कर दी हैं।फिलहाल हिरनों के दम तोड़ने का सिलसिला लगातार जारी है। शुक्रवार को भी एक हिरन भेटा व पिलखी गांवों के बीच गरसा गधेरे के पास मरा हुआ मिला। कुत्ते उसके शव को नोच रहे थे।

उर्गम घाटी की संस्था जनदेश के सचिव लक्ष्मण सिंह नेगी के अनुसार इससे पूर्व भी द्वारिधार व मोरसा के जंगलों में भी हिरनों के शव देखे गए हैं।गौरतलब है पिछले सालों में भी खुरपका रोग से दर्जनों हिरन मरे थे। हिरनों के शरीर से बाल निकले हुए हैं। शरीर पर पैच निगले हुए हैं। जंगली सुअरों में इसी तरह की बीमारी देखी गई है। क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से आग्रह किया है कि हिरनों में हो रही इस जान लेवा बीमारी से इन जंतुओं का बचाने के लिए तुरंत प्रयास किए जाने चाहिए। शुरुवात में यह कहा गया कि हिरनों को बाघ या गुलदार के अपना शिकार बनाया होगा लेकिन कई हिरन ऐसे मिले हैं जिन पर कोई खरोंच तक नहीं थी।

वन क्षेत्राधिकारी नन्दादेवी राष्ट्रीय पार्क धीरेश चन्द्र बिष्ट का कहना है हमें कई हिरनों के उर्गम के जंगलों में मरने की सूचना मिली है।सूचना मिलते ही 7 सदस्यीय टीम इलाके में भेज दी गई हैं । कितने हिरन मरे हैं कैसे मरे ये जांच के बाद ही चल पता चलेगा।

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