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पहाड़ में गुलाब की खेती बन सकती हैं आमदनी का अच्छा स्रोत

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गुलाब के दैनिक उपयोग से दांत,मसूड़े, मुंह की बदबू,टीबी रोग की रोकथाम,पायरिया जैसे कई रोग भी दूर होते है।

जोशीमठ इलाके की महिलाएं गुलाब की खेती करके कमा रही है लाखों रुपये ।
सहायता समूहों को आगे आना होगा इन महिलाओं की सहायता के लिए

दिलवर सिंह बिष्ट/सतेंद्र सिंह बिष्ट

रुद्रप्रयाग। लाल , पीला , सफ़ेद गुलाब केवल उपवन की शोभा तक ही सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसकी खेती को अगर विस्तृत रूप से किया जाए तो इसे आय के स्रोत के रूप में स्थापित किया जा सकता है। मैदानी क्षेत्रों के जागरूक किसान गुलाब की व्यावसायिक खेती करते आ रहें हैं, लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में गुलाब की खेती को प्रोत्साहन नहीं मिल पाया है। पहाड़ों में भी आर्थिक महत्व की दृष्टि से गुलाब की खेती आय का अच्छा स्रोत बन सकता है । आज गुलाब का उपयोग औषधीय क्षेत्र में, सौंदर्य प्रसाधन के रुप मे, गिफ्ट के रूप में, जूस के रूप , सजावट सहित कई जगह इसकी बहुत बड़ी मांग है।
गुलाब जो कि रोजेसी फैमिली का बहुवर्षीय पादप है, गुलाब की लगभग 100 से ज्यादा प्रजातियां हैं, जिनमें रोजा इंडिका सहित अधिकांश एशिया मूल की हैं। इसकी खेती सहज रूप से हो जाती है क्योंकि पुराने पौधे से कलम काट कर सीजन में रोपित की जा सकती हैं। आज पहाड़ों में जहां जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं उस दृष्टि से गुलाब की खेती सुरक्षित है, इसमें ज्यादा मेहनत और समय भी नही लगता है ।जरुरत है तो बस बाजार की । इस दिशा में सरकार को उद्यान विभाग की ओर से स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करना चाहिए। राजस्थान जैसे राज्यों में बेरोजगार युवा बड़े पैमाने पर गुलाब की खेती कर अपना स्वरोजगार कर रहे हैं। हमारे उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में महिलायें आगे आकार गुलाब की खेती कर लाखों कमा रही हैं।
इससे बने गुलाब जल, गुलाब तेल, प्लांटिंग मटीरियल से खूब कमाई होती है। जोशीमठ की इन महिलाओं ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को 21 जून 2018 को योग दिवस पर देहरादून में गुलाब तेल भेंट किया था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके इस प्रोत्साहन के लिए इन महिलाओं की सराहना की थी। गढ़वाल क्षेत्र में भी गुलाब की लगभग 10 से ज्यादा प्रजाति बहुत अच्छी होती हैं ,लेकिन यहाँ गुलाब को आय के स्रोत के रूप में स्थापित किया जाना अभी बाकी है।

गुलाब में कई औषधीय गुण पाये जाते हैं, गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर उसमें गिल्सरीन मिलाकर ओंठो पर लगाने से गुलाब जैसी लालिमा,कोमलता आती है। गुलाब से कई कॉस्मेटिक भी बनाये जाते हैं। गुलाब की पंखुडियों को खाने से और मसूड़े मजबूत बनते हैं, मुंह की बदबू और पायरिया जैसा रोग भी दूर होता है,अगर नींद नही आती है या तनाव रहता हो तो सिर के पास गुलाब रखकर सोएं इससे अनिद्रा की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। देसी गुलाब को अर्जुन की छाल के साथ मिलाकर उबाल कर इससे तैयार काढ़ा पीने से दिल से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है।कहते हैं रोज एक गुलाब खाने से टीबी के मरीज को आराम मिलता है। यह शरीर को शिथिलता प्रदान करता है।गुलाब के गुलकंद खाने से हड्डियां भी मजबूत बनती हैं इसकी पंखुड़ियां खाने से कब्ज में राहत मिलती है।गुलाब में विटामिन सी पाया जाता है।
रुद्रप्रयाग जिले के सामाजिक कार्यकर्ता गम्भीर सिंह बिष्ट बताते हैं कि आजकल पूरे क्षेत्र में हर जगह गुलाब घर आंगन में बहुत ही सुंदर रूप में खिले हैं लेकिन गुलाब को घर के आंगन से खेतों में स्थापित करने के लिये युवाओं, महिलाओं को आगे आने की जरुरत है।उन्होंने पहाड़ के ग्रामीण किसानों से,बेरोजगार युवाओं, महिला समूहों से अनुरोध किया है कि गुलाब की खेती की शुरूआत करें। छोटे स्तर से ही बाउंड्री फसल के रुप में कम से कम हम एक पहल स्वयं भी करें। तभी हम पलायन को रोकने में सफल हो सकते हैं।

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