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पाकिस्तान और नेपाल को पीछे से हवा दे रहा हैं चीन

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राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली : हिंदी चीनी भाई भाई , की कहावत को तो 1962 में चरितार्थ हो गई थी , लेकिन आज देश का नेतृत्व जिन सशक्त हाथों में हैं, उन्हें इस बात को ध्यान में रखकर सामरिक नीतियां बनानी होंगी कि एशिया में चीन अब भारत को चैन से नहीं बैठने देगा । खासकर जब चीन पाकिस्तान और नेपाल को आगे करके भारत को टक्कर देने की कोशिस कर रहा हैं। चीन उस समय अपनी चाल चल रहा हैं जब , भारत सहित दुनिया के लगभग सभी देश कोरोना की बीमारी से जूझ रहे हैं , और चीन हैं कि चारों ओर से भारत ,को घेरने पर लगा हुआ हैं।

शायद चीन को लगता हैं कि पाकिस्तान के सहयोग से वह भारत को टक्कर दे सकता हैं , जिसकी हकीकत आज सामने आ गई हैं , पाकिस्‍तान में चीनी दूतावास के प्रवक्‍ता वांग का एक लेख सामने आया हैं जिसमें उन्होंने लिखा हैं , ‘कश्‍मीर के यथास्थिति के दर्जे में एकतरफा बदलाव के भारत के फैसले ने चीन और पाकिस्‍तान की संप्रभुता के लिए एक चुनौती पैदा कर दिया है। इससे भारत-पाकिस्‍तान और चीन-भारत संबंध और ज्‍यादा जटिल हो गए हैं।’आर्टिकल का शीर्षक है, ‘भारत दोहरे आत्‍मविश्‍वास से अंधा हुआ।’ वांग शिदा ने लिखा हैं कि भारत के इस कदम से क्षेत्रीय शांति को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इससे चीन और पाकिस्‍तान के संप्रभुता के लिए भी बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।

इस बीच नेपाल की संसद में नए राजनीतिक नक्शे को कानूनी जामा पहनाने के लिए वहां के सांसद आज वोटिंग करेंगे। . माना जा रहा है कि इस वोटिंग में नेपाल का नया नक्शा पास हो जाएगा ,जिसके बाद भारत से विवाद बढ़ सकता है। नेपाल ने अपने नए नक्शे में भारत के कई इलाके को अपना हिस्सा बताया है। उसका दावा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिपिंयाधुरा उसके क्षेत्र में आते हैं। दूसरी तरफ उसने कम्युनिस्ट नेपाल को भी भारत के खिलाफ पैसे के बल पर खरीद लिया हैं , नेपाल में कम्युनिस्टों का शासन हैं , भारत नेपाल के रिस्ते शायद ही पहले इतने कमजोर रहे हों ।

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