Home Famous Kalinka Mela will be held on Dec 14 गढ़वाल – कुमाऊं सीमा पर लगने वाला प्रसिद्ध कालिंका मेला 14 दिसंबर...

गढ़वाल – कुमाऊं सीमा पर लगने वाला प्रसिद्ध कालिंका मेला 14 दिसंबर को

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कुलांटेश्वर/बीरोखाल : गढ़वाल /कुमाऊं सीमा से लगे प्रसिद्ध कालिंका मेले की तैयारियों जोरों पर है। इस बार मेला 14 दिसंबर को लगेगा । बड्यारी राजपूत जिसमें लगभग 14 गांव शामिल होते है , मेले की तैयारियों में जुटे हुए हैं। मेला हर तीसरे साल लगता हैं , महाकाली की पूजा में बर्ष 2011 तक पशुबलि होती थी, प्रशासन द्वारा पशु बलि को बंद कर दिए जाने के बाद अब अब यह मेला सात्विक रूप में मनाया जाता है।कहा जाता हैं कि महाकाली की दरबार से कोई खाली नहीं जाता।

अल्मोड़ा की लखोरा घाटी और गढ़वाल के बंदरकोट इलाके के राजपूतो के कई गांव इस मेले को शामिल होते हैं , कालिंका माता के बारे में प्रसिद्ध है की जो कोई भक्त यहाँ a मन्नत मांगता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती हैं , पशु बलि बंद होने से पहले यह प्रथा थी कि मन्नत पूर्ण होने पर यहाँ भैसे व बकरे की बलि चढाई जाती थी , लेकिन अब यह सब बंद हो गया हैं।

समुद्र सतह से लगभग अठारह सो मीटर उचाई पर स्थित माँ कालिंका की छठा देखते ही बनती हैं , यहाँ से आप चौखम्बा से लेकर त्रिशूल के दर्शन कर सकते हैं ।

कैसे पहुंचे कालिंका मंदिर : दिल्ली के आनंद बिहार से उत्तराखंड रोडवेज की बस शाम ६ बजे बंदरकोट के लिए सीधे जाती है , इसके साथ ही दिल्ली से सराईखेत -बुंगीधार वाली बस भी आपको , बजवाड़ नामक स्थान पर छोड़ेगी , वहां से आप टैक्सी से सीधे मंदिर की एक किलोमीटर नीचे पहुंच सकते हैं . मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग गढ़वाल की तरफ से तीन किलोमीटर की सीधी चढाई हैं जबकि कुमाऊं की ओर से एक किलोमीटर की चढाई चढ़नी पड़ती हैं ।

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