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बीमार उत्तराखंड : महिलाओं के साहस ने उसे कंधे पर लादकर 20 किमी दूर अस्पताल तो पंहुचा दिया लेकिन अस्पताल ही बीमार था

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राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

बागेश्वर : ये कहानी नहीं बल्कि सच्चाई हैं उस प्रदेश की जिसे बने हुए 20 साल हो गए हैं , सरकारें इतनी निकम्मी आई कि आज भी गांव में बेसिक सुबिधायें तक नहीं दे पा रही हैं। महिलाओं को पहाड़ की रीड कहा जाता हैं। वह ऐसे ही नहीं कहा जाता हैं इसका जीता जगता उदाहरण सुविधाओं से वंचित बागेश्‍वर जिले के बोरबलड़ा गांव में देखने को मिला , जहाँ की महिलाओं ने हादसे में घायल हुए ग्रामीण को कंधों पर उठाकर 20 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया। लेकिन हाल देखिये अस्पताल की पास एनेस्‍थीसिया तक नहीं था ।
दरअसल बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लाॅक के दूरस्थ गांव बोरबलड़ा गांव के समडर में चारा पत्ती काटते समय 38 वर्षीय खिलाफ सिंह पेड़ से गिर गए। हादसे में उनका पांव टूट गया व शरीर में अन्य हिस्सों में भी चोट आई। गांव में किसी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण सबसे बड़ी समस्या थी घायल को उपचार कैसे दिलाया जाए। सड़क सुविधा न होने के कारण खिलाफ सिंह को अस्पताल अस्पताल पहुंचाना भी बड़ी समस्या थी। निकटवर्ती बधियाकोट कस्बे में एक अस्पताल है वहां तक पहुंचने के लिए 20 किमी दुर्गम पहाड़ी रास्ता पार करना पड़ता है। गांव में पलायन की वजह से पुरुषों की संख्या भी बहुत कम है।

गांव की महिलाओं ने डोली के जरिये घायल खिलाफ सिंह को कंधों पर उठाकर बदियाकोट तक पहुंचाया। बदियाकोट स्वास्थ्य केंद्र एक फार्मासिस्ट के हवाले है, जिसकी हालत खुद ही जर्जर है लिहाजा घायल को वाहन के जरिये 70 किमी दूरी पर स्थित जिला अस्पताल भेजा गया। ग्रामीण को अस्पताल पहुंचाने में गांव की महिला प्रीति देवी, चंद्रा देवी, सावित्री देवी, बबीता आदि के साहस को सभी ग्रामीण सलाम कर रहे हैं।

जिला अस्पताल का हाल भी वही एनेस्थिसियन तक नहीं। ऐसे में घायल का कैसे इलाज हो ना ही अस्पताल जनता हैं और न ही जिला प्रशासन।

 

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