Home UTTARAKHAND ROADWAYS BUSE LEFT PASSENGER ON MIDWAY मुख्यमंत्री जी, गुजराती आपका, तो उत्तराखंडी किसका ?

मुख्यमंत्री जी, गुजराती आपका, तो उत्तराखंडी किसका ?

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आखिर क्योँ 60 उत्तराखंडियों को हरियाणा बॉर्डर पर छोड़ कर चली गई उत्तराखंड की बसें

राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

गुडगाँव : उत्तराखंड में फंसे गुजरात के 1,800 लोगों को शनिवार रात 25 बसों से अहमदाबाद तो सुरक्षित भेज दिया गया ,परन्तु जिस उत्तराखंड की ये बसें थी वहां के लोगों को अहमदाबाद से लाकर गुड़गांव में मरने के लिए छोड़ दिया गया। गुजरात का मंत्री से संतरी अगर कहे कि दिन में भी रात है तो रात हैं , उत्तराखंड का नागरिक अगर कहता है कि हमारी जान बचा लो तो टांग टूटे हुई मरीज को भी बस से उतार दिया जाता है। धन्य हो मुख्यमंत्री जी और बरिष्ठ मंत्री आर्य जी , आपका उपकार तो उत्तराखंड की जनता शायद ही उतार सकेगी , आपने उन्हें सड़क पर मरने के लिए जो छोड़ दिया है।

 

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री को जब इस बात का पता चला तो बेशर्म एमडी उत्तराखंड परिवहन निगम रणबीर चौहान क्या कहता हैं सुनिए – गुजरात गई बसों में उत्तराखंड के 60 लोगों को लाया जा रहा था।  यानि एक बस में दो सवारी ,अगर हरियाणा बॉर्डर बंद था तो बसें क्या हरियाणा ही रुकी है ? आगे सुनिए मत चूको चौहान की , लाॅकडाऊन के कारण हरियाणा बार्डर पूरी तरह सील था।  वहां पुलिस ने बस को रोक दिया , किसी भी यात्री को बस में ले जाने की अनुमति से इंकार कर दिया। वहां और भी दूसरी बहुत सी बसों को रोका गया था। बस के साथ गए टीआई द्वारा बहुत अनुरोध करने पर भी पुलिस द्वारा गाङी को सीज करने की चेतावनी दी गई। पुलिस ने किसी भी बस में एक भी यात्री को ले जाने की अनुमति नहीं दी। यात्रियों को उतारकर बसों को रवाना कर दिया गया। बस यही आप निशाना चूक गए चौहान , क्या आपने किसी मंत्री -संत्री सी बात की , कि हमारे कितने लोग वहां फसे हैं? यात्रियों के प्रति आप कितने संबेदनशील है यह अब जग जाहिर हो चूका हैं।


थके – प्यासे उत्तराखंड के लोग हताश और निराश होकर उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों और नेताओं को फोन करते रहे लेकिन उन्हें एक ही जवाब मिला,” कल सुबह 9:00 बजे के बाद फोन करना, अभी सब सोए हुए हैं।”हरियाणा पुलिस से तो उम्मीद ही क्या की जा सकती हैं खैर बस में से उतारे गए लोग पैदल ही सारी रात दिल्ली की तरफ बढ़ते रहे। इनमें से रोहित नाम के एक युवक का एक्सीडेंट हो गया , और वह टूटी हुई टांग लेकर ही धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा।

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