Home 30 ITBP JAWAN TRAPPED मुनस्यारी : भारी बर्फबारी में फंसे आईटीबीपी के 30 जवान

मुनस्यारी : भारी बर्फबारी में फंसे आईटीबीपी के 30 जवान

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राकेश डंडरियाल

मुनस्यारी।मुनस्यारी में हो रही लगातार बर्फबारी के बाद भारत चीन सीमा से लगी आईटीबीपी की बुगडियार और रेलकोट चौकियों पर आईटीबीपी के लगभग 25 से 30 जवानों के फसने की खबर हैं। बर्फवारी इतनी ज्यादा हैं कि सहायता केवल हेलीकॉप्टर से ही सहायता जा सकती हैं , लेकिन मौसम साफ़ न होने के कारण दुश्वारियां बढ़ती ही जा रही हैं ।

सीमा पर स्थित रेलकोट में 18 एवं बुगडियार में 12 जवान फसे हैं । इलाके में लगातार हिमस्खलन हो रहा हैं जिस कारण से जवान चौकियां खाली करने से डर रहे हैं । हालाँकि आईटीबीपी इस मामले में कुछ बोलने से परहेज कर रही हैं,सूत्रों के अनुसार चौकियों को खाली कराने के लिए 11 पोर्टर भेजे गए थे लेकिन वे भी बर्फबारी में फंस गए।

गौरतलब हैं कि भारत चीन सीमा पर उच्च हिमालयी क्षेत्र बुगडियार और रेलकोट में आईटीबीपी की चौकियां हैं। अक्षर बर्फबारी से पहले इस प्रकार के खतरे को देखते हुए इन दोनों चौकियों को 15 दिसंबर तक खाली करके जवानों की तैनाती लीलम और मिलम चौकियों पर कर दी जाती थी लेकिन इस बार समय से पहले ही भारी बर्फबारी हो जाने के कारण जवानों की परेशानी बढ़ गई है। बताया जा रहा हैं कि इन दोनों चौकिओं पर 12 दिसंबर को लगभग 6 फीट से अधिक बर्फ गिरी। इससे चौकियों में हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है। हिमस्खलन की आशंका में जवान चौकियों से वापस नहीं आ पा रहे हैं।
जबरदस्त बर्फवारी से चौकियों को जोड़ने वाले पैदल रास्तों में 15 से 20 फीट ऊँची बर्फ के पहाड़ बन गए हैं। नहर देवी, रेलकोट, स्यूनी, मपांग स्थानों में लगातार हिमस्खलन हो रहा है। इससे जवानों का पैदल लौटना मुश्किल हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक रेलकोट चौकी में 18 जवान और 6 पोर्टर जबकि बुगडियार चौकी में 12 जवान और 5 पोर्टर फंसे हैं। मिलम ट्रैक कराने वाले ट्रेवल एजेंट बीरु बुग्याल और नरेंद्र कुमार का कहना है कि नहर देवी के पास बर्फ के पहाड़ काटे बगैर चौकियों से वापस आने में खतरा अधिक है।

वर्ष 1990 में बुगडियार चौकी हिमस्खलन की भेंट चढ़ गई थी। तब वहां तैनात 5 जवान बर्फ का पहाड़ टूटने से जिंदा दफन हो गए थे। वर्ष 1976 में इन दोनों चौकियों में तैनात जवानों को सामान आपूर्ति करने के लिए जा रहे पोर्टर और घोड़े 4 माह तक मिलम में ही फंसे रहे। इनके लिए हैली से खाना भेजा गया था।

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