Home Uncategorized मेरी आवाज सुनो : विकलांग विनोद सिंह राणा को हैं मदद की...

मेरी आवाज सुनो : विकलांग विनोद सिंह राणा को हैं मदद की दरकार, तो पत्नी के आगे हैं बच्चों और बूढी सास को पालने की चुनौती

333
0

देवेन्द्र चमोली

अगस्त्यमुनि: कहते है मुसीबत बोल कर नहीं आती, ऐसे ही मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा कमेड़ा (तोली) निवासी अपाहिज विनोद राणा के परिवार पर। स्थिति यह है कि पति की विकलांगता के कारण बूड़ी सास सहित दो बच्चों के भरण पोषण की सारी जिम्मेदारी विनोद की पत्नी दीना देवी पर आ पड़ी। एक ओर गरीबी की मार, उसमें अपाहिज पति की महंगी दवाईयों का बोझ दीना देवी के लिये किसी चुनौती से कम नहीं है।

अगस्त्यमुनि विकासखड के कमेड़ा (तोली) निवासी 32 वर्षीय विनोद सिंह राणा ने दो वर्ष पूर्व तक कभी सोचा भी नहीं था कि नियति उसके साथ ऐसा क्रूर खेल खेलेगी,और जीते जी जिंदगी उनके लिए नरक बन जायेगी। दो साल पहले विनोद सिहं राणा हरिद्वार में प्राईवेट टैक्सी चला कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। वर्ष 2018 में विनोद सिहं अचानक ऐसी बीमारी ने घेर लिया कि उसके हाथ-पाँव सहित शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। गरीब बृद्ध माता पिता ने अपने इकलौता बेटे विनोद के ईलाज के लिए कर्ज लेकर उसे दिल्ली एम्स से लेकर प्रदेश के कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन लाखों खर्च करनेे के बाबजूद बिनोद थी नहीं हुआ , आज भी उसकी स्थिति दयनीया बनी हुई हैं ।
स्थित यह है कि विनोद आज अंदर बाहर जाने के लिए भी दो लोगों का सहारा चाहिए , बिना सहारे के विनोद बिस्तर से खड़ा तक नहीं हो पाता। अपाहिज विनोद के परिवार के दुःखों की दास्तान यहीं खत्म नही हुई परिवार पर तब दुःखों का बड़ा पहाड़ टूट पड़ा जब मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले बूड़े पिता का भी दो माह पूर्व स्वर्गवास हो गया। अब परिवार की सारी जिम्मेवारी विनोद की पत्नी दीना देवी पर आ गई । एक ओर विनोद की मंहगी दवाई का खर्चा, तो दूसरी ओर अबोध बच्चों के भरण पोषण का संकट।

विनोद की पत्नी दीना देवी ने अपनी दुःख भरी कहानी बताते हुई कहां कि हर महीने तीन हजार की दवाईयों का खर्चा उसको अंदर ही अंदर से तोड़ रही है। स्थिति यह है कि परिवार दाने-दाने को मौहताज है।

आयुष्मान योजना की भी फायदा नहीं मिला

विनोद की पत्नी का कहना है कि दो वर्षों से विकलांग अवस्था में पड़े उनके पति को सरकार की आयुष्मान योजना भी कोई काम नहीं आई और न ही सरकार की स्वास्थ्य सेंवायें। अपाहिज विनोद को अब तक समाज कल्याण की विकलांग पेशंन का लाभ भी अभी तक नहीं मिल पाया है। लाखों का कर्ज के बोझ तले दबे विनोद के परिवार अब पूरी तरह से थक-हार कर सारी उम्मीद खो चुका है। यहां तक की अब लोगों से मदद मांगने की हिम्मत भी परिवार नहीं जुटा पा रहा है। नियति को कोषते आखों मे आंसू लिए बूढ़ी माँ आते जाते लोगों के ढाढ़स के एक सहारे अपने दुःखी जीवन को काटने को मजबूर है।

LEAVE A REPLY