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राजस्व उपनिरीक्षकों की कमी से जूझ रही है पिण्डरघाटी

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सुभाष पिमोली
थराली।कहां रह गया नीति और कहां रह गया माणा। एक श्याम सिंह पटवारी जाए तो जाए कहां। ये स्तिथि है इकीसवीं सदी के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाली पिण्डर घाटी की। यूँ तो पिंडर घाटी दशकों से ही सुविधाओं के लिए जूझ ही रही है , लेकिन इन दिनों दौर कोरोना का है ,और इस महामारी से इस वक्त पहाड़ भी अछूता नही है ,विभिन्न राज्यो से आए प्रवासियों को स्कूलों और घरों में होम कोरेंटाइन पर रखा गया है ,कोरेंटाइन के उलंघन पर कानूनन कार्यवाही का भी प्रावधान रखा गया है ,लेकिन प्रशासन की सबसे छोटी इकाई राजस्व उपनिरीक्षको की पिण्डर घाटी में भारी कमी से भी इस समय पिण्डरघाटी जूझ रही है। राजस्व उपनिरीक्षक शासन-प्रशासन और आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। ये वही पटवारी हैं जो आम जनता और सरकार के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं । लेकिन पिण्डर घाटी के तीन तहसीलों की 18 पटवारी क्षेत्रो में महज 10 पटवारियों की नियुक्ति नाकाफी साबित हो रही है। आलम ये है कि एक ही पटवारी के भरोसे 2 से 3 पटवारी क्षेत्र हैं। इन 10 पटवारियों में से भी कई नए चेहरे हैं ,ऐसे में अनुभवी राजस्व उपनिरीक्षकों को भी इनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाना होता है। राजस्व विभाग का आलम ये है कि तीनों तहसीलों में एक भी तहसीलदार की तैनाती नही है, अलबत्ता व्यवस्था पर थराली तहसील में नायब तहसीलदार को तहसीलदार का प्रभार दे दिया गया है जो तीनों तहसीलों का जिम्मा संभाले हुए हैं ।


थराली तहसील में कुल 48,नारायणबगड़ में 79,और देवाल में 44 ग्राम सभाएं हैं, जिनमें घेस ,वाण, बांक, जुनेर,जाख पट्यो, रतगांव, पार्था सहित दर्जनों गांव दूरस्थ गांवों में से एक हैं, जहां रेगुलर पुलिस की जद से कई दूर है ,यहां भूमि संबंधी कार्यो के अलावा शांति व्यवस्था और कानून का पालन करवाने की जिम्मेदारी इन्ही पटवारियों के भरोसे है। ऐसे में कोरोना महामारी के इस दौर में इन राजस्व उपनिरीक्षकों की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ गयी है एक से अधिक राजस्व क्षेत्रो का जिम्मा संभालने के चलते इन राजस्व उपनिरीक्षकों को तहसील परिसर कार्यालयों में ही बैठना पड़ता है ऐसे में किसी, घटना,दुर्घटना या अन्य परिस्थितियों में दूरस्थ गांवों तक पहुंचने में ही पटवारियों को घंटो लग जाते हैं ,ऐसा नहीं है कि ये परिस्थितियां आजकल की ही बनी हुई है ये परिस्थितियां पिछले कई वर्षों से पिण्डरघाटी क्षेत्र में बनी हुई हैं लेकिन कोरोना महामारी के इस दौर में राजस्व उपनिरीक्षकों के कंधों पर जिम्मेदारियों का भार भी कई गुना बढ़ गया है। इस बात को भी नकारा नही जा सकता है प्रवासियों के आने जाने की सूचना से लेकर,होम कोरेंटाइन का पालन करवाना,उलंघन करने पर मुकदमो की कार्यवाही तक और इसके अलावा भी विभिन्न प्रमाण पत्रों की आख्या,घटना दुर्घटनाओं की स्थिति में मौके पर पहुंचना,भूमि संबंधी कार्यो की जिम्मेदारी वाकई इस समय इन सब जिम्मेदारियों के बोझ तले राजस्व उपनिरीक्षकों के पसीने छूट रहे हैं इस बात से गुरेज भी नही किया जा सकता है वही थराली के उप जिला अधिकारी भी इस बात को मानते हैं कि उनके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं फिर भी तालमेल बना कर काम करना पड़ता हैं।

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