Home ROSHANI CHAUHAN NEW BRAND AMBASDOR OF RUDRAPARYAG रुद्रप्रयाग के गाँवों में रोजगार की राह दिखाती “रोशनी चौहान”

रुद्रप्रयाग के गाँवों में रोजगार की राह दिखाती “रोशनी चौहान”

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कैलाश जोशी “अकेला (ग्राम विल्ठा कोटमा जिला रुद्रप्रयाग से )

रुद्रप्रयाग : महिला किसान की बात करने पर लोगों के जेहन में अभी तक सिर्फ महिला मजदूरों की तस्वीर आती थी, लेकिन कुछ महिलाएं सफल किसान बनकर इस भ्रम को तोड़ रही है। उत्तराखंड की छात्रा ” रोशनी चौहान” पहाड़ों में मशरूम की खेती से सालाना अच्छी कमाई करनी लगी है, उनकी बदौलत सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को रोजागार भी उपलब्ध करा रही है, अपनी मेहनत और लगन से असम्भव काम को सम्भव कर दिखाया है । इनकी मेहनत से पलायन करने वाले लोगों की संख्या यहां कम हो रही है। कम पैसे में कैसे यहां की महिलाये मशरूम उत्पादन की शुरूवात कर सकती हैं इस बात का रोशनी ने खास ध्यान दिया है।

एक ओर तो उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों के युवा रोजगार की तलाश में देश -विदेश तक भटक रहे हैं, वही ऐसी भी मिसाल मिलने लगी हैं कि पढाई के साथ -साथ लड़कियां एग्रिकल्चर में अपना फ्यूचर आजमा रही हैं, और सफलता के झंडे भी ऊंचा कर रही हैं। यह कहानी है ग्राम विल्ठा कोटमा जिला रुद्रप्रयाग की रहने वाली “रोशनी चौहान” की, जिन्होंने मशरूम का उत्पादन सीख कर घर के एक कोने से उत्पादन शुरू किया और आज उनका खुद का मशरूम कल्टीवेशन प्लांट खड़ा हो चुका है। वैसे तो पहाड़ों में गिनी-चुनी लड़कियां ही पढ़-लिखकर स्वरोजगार का हौसला करती हैं।

मशरुम उत्पादन का काम शुरू करने से पहले रोशनी ने उत्तराखंड की ब्रांड अम्बेस्डर (मशरुम) दिव्या रावत से मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया तथा दो साल पूर्व अपने गांव से मशरुम उत्पादन की शुरूआत, क्योंकि यहां पर खेती-पानी आदि की सुविधा है। आज वह मशरूम का अच्छा उत्पादन कर रही हैं, एक सीजन में वह अच्छी कमाई कर लेती हैं। रोशनी ने अपने गांव के साथ -साथ लगभग 15 से 20 गॉंवों की महिलाओं को अपने साथ जोड़कर रखा है, जिससे उन्हें रोजगार मिल रहा है।

रोशनी ने मशरूम उत्पादन में अच्छी कमाई के साथ ही अनेक गावों में अपना छोटा सा उत्पादन केंद्र स्थापित किया हुआ है जहां अब भारी मात्रा में प्रोडक्शन हो रहा है। उनके प्लांट में में विभिन्न प्रजाति के मशरूम उत्पादित किये जा रहे हैं- जिनमें ढींगरी मुख्य है, इसकी सप्लाई के लिए कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग के साथ छोटे कस्बों में अपने ही आउटलेट्स खोले हुए है। इस समय वह एक दिन में करीब 200 किलो मशरूम का उत्पादन कर लेती हैं। रोशनी की कोशिशों की बदौलत ही आज आसपास के कई गांवों की महिलाओं के घरों में चूल्हे जल रहे हैं। रोशनी अब अपना एक बड़ा मशरुम प्लांट बनाना चाहती है, जिसमें कि उनकी मां और भाई-बहनों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।

रोशनी ने हमारे संवाददाता कैलाश जोशी “अकेला “से बातचीत में बताया कि “मैंने उत्तराखंड के ज्यादातर घरों में ताला लगा देखा। चार-पांच हजार रुपए के लिए यहां के लोग घरों को खाली कर पलायन कर रहे है जिसकी मुख्य वजह रोजगार न होना है। मैंने ठान लिया है कि कुछ ऐसा प्रयास जरुर करूंगी जिससे लोगों को अपने ही गावों में रोजगार मिल सके।”

रोशनी खुद लोगों को मशरूम की खेती के लिए प्रेरित कर रही है, उन्होंने लोगों को भी मशरूम का बाजार दिलवाया है । पहाड़ों पर मशरुम 150 से 200 रुपये में फुटकर में बिकता है। ये लोग अब सर्दियों में बटन, मिड सीजन में ओएस्टर और गर्मियों में मिल्की मशरूम का उत्पादन करते हैं। बटन मशरूम एक महीने में ओएस्टर 15 दिन में और मिल्की मशरूम 45 दिन में तैयार हो जाता है। रोशनी कहती हैं, “मैंने लोगों को बताने के बजाय खुद करके दिखाया जिससे उनका विश्वास बढ़ा।”

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