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रुद्रप्रयाग : ड्रोन द्वारा लॉक डाउन पर निगरानी

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दिलबर सिंह बिष्ट
रुद्रप्रयाग : जिला रुद्रप्रयाग में लॉक डाउन के दौरान बाहर घूमने वाले लोगों व राज्य के बाहर से आये लोगों पर जिला प्रशासन द्वारा ड्रोन के माध्यम से पैनी नज़र रखी जा रही है। इस दौरान कई ऐसे लोग पकडे गए है जिन्हें घर मे रहने की सलाह दी गई थी। खुले आम बाहर घूमने वाले 15 लोगों के विरुद्ध जिला प्रशासन ने धारा 188 के तहत चालान किये है , ये सभी लोग बाहर के बताये गए हैं , प्रशासन ने एक बार फिर से जनपद में बाहर से आये लोगों को प्रशासन ने घर मे रहने की सलाह दी है।

जनपद में लॉक डाउन अवधि में नियमों का उल्लघंन करने पर पुलिस द्वारा अभी तक जनपद के कुल 186 लोगो के खिलाफ धारा 188 के तहत चालान किया गये है। कुल 186 लोगों में से 15 ऐसे लोगों के चालान किया गए है, जिन्हें होम क्वारेंटाईन में रहने की सलाह दी गई थी। ये सभी लोग जनपद में बाहर से आये थे। इस आशय की जानकारी देते हुय जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि लोग कोविड19 को गंभीरता से नहीं ले रहे है। इसके लिये प्रशासन द्वारा ड्रोन के माध्यम से निगरानी कराई जा रही है।

वैश्विक महामारी से निपटने के लिए जनता को 14 दिन तक घर में रहने की सलाह दी गई है, किंतु ऐसे लोग क्वारेंटाईन का अनुपालन नहीं कर रहे है। फिलहाल पुलिस द्वारा ऐसे 15 लोगो के विरुद्ध धारा-188 के तहत चालान किया गया है,

क्या है आईपीसी की धारा 188
1897 के महामारी कानून के सेक्शन 3 में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई प्रावधानों का उल्लंघन करता है, सरकार / कानून के निर्देशों / नियमों को तोड़ता है, तो उसे आईपीसी की धारा 188 के तहत दंडित किया जा सकता है। इस संबंध में किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दिए निर्देशों का उल्लंघन करने पर भी आपके खिलाफ ये धारा लगाई जा सकती है।

क्या मिल सकती है सजा

आईपीसी की धारा 188 के तहत दो प्रावधान हैं-
पहला – अगर आप सरकार या किसी सरकारी अधिकारी द्वारा कानूनी रूप से दिए गए आदेशों का उल्लंघन करते हैं, या आपकी किसी हरकत से कानून व्यवस्था में लगे शख्स को नुकसान पहुंचता है, तो आपको कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

दूसरा – अगर आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा, आदि को खतरा होता है, तो आपको कम से कम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

क्रिमिनल प्रोसीजर कोड1973 के पहले शेड्यूल के अनुसार, दोनों ही स्थिति में जमानत मिल सकती है और कार्रवाई किसी भी मैजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है।

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