Home No house for Dalit under Pradhan Mantri Awas Yojana रुद्रप्रयाग : तीन बच्चों के साथ एक अदद मकान की तलाश में...

रुद्रप्रयाग : तीन बच्चों के साथ एक अदद मकान की तलाश में भटकती दलित महिला

409
0

रामरतन सिह पवांर

जखोली: ऊपर फोटो में दिख रही ये दलित महिला हैं जखोली के अन्तर्गत ग्राम पंचायत पौठी सिलगढ की रहने वाली दलित पार्वती देबी। 32 बर्षीय पार्वती पत्नी दिनेश लाल पिछले पाँच सालों से अपने लिए आवास पाने के लिये दर दर भटक रही है। पौठी गांव की पार्वती देबी के पास अपने गुजर बसर के लिए एक कच्चा आवास था, जो कि पाँच बर्ष पूर्व आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था।

यहां से शुरू होती हैं, पार्वती देबी की दुस्वारियाँ, पहले तो पार्वती आवास बिहीन हो गई। पार्वती का कहना है कि मैने कई बार प्रधान से आवास दिलाने की बात कही लेकिन केवल अश्वासन के शिवाय कुछ नही मिला। आश्वासन तो दूर ग्राम प्रधान ने मार पीट करके पार्वती देबी को गाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया । पार्वती अपने तीन बच्चों सुखदेव सात बर्ष, महेश आठ बर्ष व साहिल तेरह बर्ष इन तीनो बच्चों के साथ गाव से बाहर रह रही हैं । मजेदार बात यह हैं कि बर्ष 2018 मे पौठी गांव मे आवास बिहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयन प्रक्रिया भी सरकार द्वारा चलाई गई थी, लेकिन उस योजना मे भी प्रधान व पंचायत मंत्री ने जानबूझकर कर आवास के लिए पार्वती देबी का चयन नहीं किया गया ।

अब पार्वती देबी जाये। तो कहां जाये। तब यह दलित महिला अपने बच्चों तीनो बच्चों सहित अपने मायके चली गई , साथ ही पार्वती देबी के सामने अपने बच्चों के भरण पोषण का भी संकट पैदा हो गया । आज पार्वती देबी इतने सालो से अपने तीनो बच्चों के साथ दुख के साये मे मायके मे अपने माँ बाप के साथ दिन काट रही हैं । पार्वती का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत आवास बिहीन परिवारो को आवास देने हेतु सर्वेक्षण का भी काम किया गया था,जो सर्वे ग्राम प्रधान व पंचायत मंत्री के द्वारा किया गया ।दलित महिला का कहना है कि सर्वे के दौरान मैने भी अपने को आवास मे चयनित किये जाने का अनुरोध प्रधान व पंचायत मंत्री से किया था ,लेकिन किसी ने मेरी नही सुनी और मुझे अपने हक से दूर रख दिया।

वर्तमान समय मे पौठी गांव मे 95 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए चयनित किया गया है, जिनमें अधिकतर ऐसे परिवारो को आवास हेतू चुना गया है जिनके पास पहले से ही बड़े बड़े आवास है, और वे लोग आर्थिक रूप से समृद्ध हैं । यह भी जांच का एक विषय हैं ।
अपने को आवास दिलाने वाली जंग हार चुकी पार्वती ने एक बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र की ओर रुख किया , और आवास दिलवाने के लिए एक पत्र भेजा । पत्र भी शायद उसी परंपरा में कही धूल फाकता रहा गया । हारी और थकी पार्वती देबी का कहना है कि अगर मुझे मेरा हक नही दिया गया तो में अपने तीनो बच्चों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय मे धरने पर बैठ जाऊँगी, और अगर इससे भी बात नही बनी तो फिर आमरण अनशन करूँगी।

LEAVE A REPLY