Home Uncategorized लॉकडाउन और लगातार हो रही ओलावृष्टि के कारण काफल की फसल को...

लॉकडाउन और लगातार हो रही ओलावृष्टि के कारण काफल की फसल को भारी नुकसान

270
0

प्रकृति : रसीला और स्वादिष्ट फल काफल खाने को तरस जाएंगे लोग इस साल…..  
कोरोना,बारिश और ओलों से खट्टे-मीठे काफल बर्बाद बेचने वाले भी निराश होंगे इस वर्ष

दिलवर सिंह बिष्ट
रुद्रप्रयाग- ….’
काफल पाक्यो मीन नी चाख्यो’…  ग्रीष्म ऋतु के दौरान पहाड़ की वादियों में चातक के मधुुुर स्वर मेंं गूंजने वाला यह गीत  इस बार हकीकत में उत्तराखंड के लोगों के लिये सटीक बैठ रही है। वैश्विक महामारी कोरोना ने जहाँ पूरे विश्व के लोगों के रोजगार को लॉक डाउन कर दिया है, वहींं  प्राकृतिक कन्द मूल फलों पर भी इस का बुरा असर पड़ा है।हालत यह है कि उत्तराखंड के लोगों की काफल खाने की चाहत व उसकी बिक्री से  रोजी-रोटी का  जुगाड़  कर पाने की हसरत भी इस बार अधूूरी रह जाएगी। 

इन दिनोंं पहाड़ी क्षेत्रों में काफल के पेड़ों में काफल अधिक मात्रा में आये हैंं।लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन ने इस रसीले औषधीय गुणों से युक्त प्राकृतिक जंगली फल के रसीले स्वाद को लोगों के मुंह से दूर कर दिया है। ऐसा नहींं कि बाहरी लोग ही इस के खट्टे-मीठे स्वाद से वंचित हों बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी इसका स्वाद लेने को तरस रहे हैं।बता दें कि जैसे ही काफल पक रहे हैंं तब तक प्रकृति इन्हें लोगों के मुंह तक जाने ही नहींं दे रही हैै। रोज सायं  होते ही भारी बारिश और ओलों की वजह से यह झड़ जा रहे हैं। लोग इनका स्वाद लिये बगैर ही मायूसी से अपने घर वापस लौट रहे हैंं।इस वर्ष इस ब्यवसाय से जुड़े स्थानीय लोगों को जो काफल से थोड़ी बहुत आमदनी के साथ रोजगार हो जाता था, वह भी शून्य हो गया है।

युवा धीरेंद्र सिंह , भरत सिंह और पवन सिंह बताते हैं कि इस वर्ष जबकि काफल काफी मात्रा में हैं लेकिन एक ओर कोरोना ने लोगों को दु:खी किया हुआ है वहींं दूसरी ओर रोज सायं होते ही भारी बारिश और ओले पड़ने से काफल बर्बाद हो रहेे हैं, ऐसे में काफल खाने की लालसा पूरी नहीं हो पा रही है। इस सीजन में काफल से जहां लोगों को थोड़ा बहुत रोजगार मिल जाता था और यह आय का एक साधन था, वह भी चौपट हो गया है।आज यह स्थिति बनी है कि घर गांव के लोगों को काफल के रसीले स्वाद को लेने के लाले पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार काफल खाने के शौकिनों को कोरोना महामारी के चलते और भारी बारिश की वजह से मनमसोस कर रह जाना होगा।बहरहाल ,  इस वर्ष काफल खाने वालों को और इसे बेच कर चंद दिनों का रोजगार पाने वाले लोगों को भी  काफल के नाम से  पिछले वर्ष खाये और बेचे गये काफलों को याद करने को विवश होना पड़ेगा।

LEAVE A REPLY