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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुले

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जोध सिंह रावत

गैरसैंण।18 मई। चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट सोमबार सुबह श्रद्धालुओ के लिए खोल दिए गए हैं। 16 मई को पत्र, पुष्प व आभूषणों से सजी भगवान रुद्रनाथ की डोली गोपीनाथ मन्दिर गोपेश्वर से रवाना हुई थी, पुंग खर्क में रात्रि विश्राम के बाद रविबार को डोली रुद्रनाथ पहुंची व सोमबार ब्रह्म मुहूर्त पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओ के लिए खोल दिये गए हैं। पंडित वेद प्रकाश भट्ट 6 माह तक मंदिर में विधिवत शास्त्रोक्त पूजा सम्पन्न करेंगे।

पंच केदार में शामिल भगवान रुद्रनाथ का मंदिर भारत में मात्र एक मंदिर ऐसा है जहां भोलेनाथ के मुख दर्शन होते हैं। समुद्र सतह से 8 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे रुद्रनाथ धाम पहुंचने के लिए चमोली जनपद मुख्यालय गोपेश्वर से 24 की0मी0 दूरी पैदल तय कर पहुचा जा सकता है।

नन्दा देवी और त्रिशूल की हिमाच्छादित चोटियों की अलौकिक व भव्य प्राकृतिक छटा यहां मन को शकुन देती है। रुद्रनाथ में भगवान शंकर की मुख पूजा की जाती है, जबकि संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में की जाती है।

हर वर्ष यहां रास्ते मे ग्रामीण छोटी-छोटी दुकान लगाते रहे हैं जहाँ यात्री कुछ पल ठहर कर जलपान करते हैं किंतु इस बार कोरोना आपदा के चलते रास्ते की रौनक गायब है।

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