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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा, भगवान बद्रीनाथ की पूजा में परिवर्तन, देश के लिए अशुभ

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तिथि बदलना अशुभ

राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

गोपेश्वर। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि में परिवर्तन करने पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चारो धामों यमुनोत्री ,गंगोत्री ,केदारनाथ और बद्रीनाथ में जो परंपरागत तरीके से भगवान का पूजन अर्चना चली आ रही हैं , सरकार का ये कर्त्तव्य हैं कि उसमें किसी प्रकार का व्यवधान न होने दे। कुछ ऐसी संस्थायें हैं जो हिन्दुओं के नाम पर हिन्दू परम्पराओं को नष्ट करना चाहती हैं , उनमें एक बिश्व हिन्दू परिषद् भी हैं। ऐसे लोग चाहते हैं कि बद्रीनाथ की मूर्ति को 6 महीने के लिए हरिद्वार ले जाया जाए,यदि इस प्रकार का कोई परिवर्तन होगा तो जो सनातन धर्म की आस्था हैं वो स्थिल हो जाएगी। परंपरा का लोप नहीं होना चाहिए , वो मूर्ति जबतक बद्रीनाथ में हैं तब तक बद्रीनाथ हैं ।

आपने एक तो रावल का बुलाने में बिलम्ब किया ,जब आदि शंकराचार्य की गद्दी के सामने पट्ट खुलने का दिन तय हो गया ,तो उसे बदला क्यों ,स्वाभाविक रूप से देवता वहां से हट जायेंगे ,जो शीत काल में भगवान की पूजा करते हैं तो वो तो हट गए , आपने जो दिन तय किया था उस दौरान पूजा भी नहीं करवा रहे हैं ,तो उतने समय तक भगवान बिना पूजा के रह जायेंगे। जो देश के लिए अमंगल कारक होगा , इसलिए हमारा स्पस्ट मत हैं कि यथावत जो भगवान की पूजा अर्चना का बनाये रखा जाय , जिससे भक्तो के मन में श्रद्धा कम न हो ।
उत्तराखंड सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पहले तो सरकार ने रावल को बुलाने में ही विलंब किया और आप कहते हैं कि कोरोना से नहीं डरना चाहिए जब रावल में कोरोना के कोई लक्षण ही नहीं है तो 10 दिन के लिए क्यों इंतजार किया जा रहा है साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इस तरह से भगवान बद्रीनाथ की पूजा में परिवर्तन किया गया तो यह देश के लिये अमंगलकारी होगा ,
उन्होंने कहा कि रावल की मौजूदगी के बाद भी टिहरी महाराजा की अनुमति से बदरीनाथ के कपाट खोलने की तिथि बदलना सर्वथा अनुचित और अशुभकारी है।

गोपेश्वर में जारी एक एक वक्तव्य में शंकराचार्य ने कहा कि बदरीनाथ की प्रतिमा का स्पर्श सिर्फ बाल ब्रह्मचारी ही कर सकता है। इसलिए गृहस्थ डिमरी स्वयं पूजा न कर पूजन सामग्री रावल को सौंपते हैं। बदरीनाथ के कपाट खोलने के लिए शुभ मुहूर्त निकालने की एक प्रक्रिया है। इसके तहत गणेशादि का स्मरण और आद्य शंकराचार्य की गद्दी से अनुमति लेकर पूजा शुरू करने की तिथि निकाली जाती है।
शंकराचार्य ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज द्वारा कपाटोद्घाटन की तिथि में परिवर्तन के निर्णय पर सहमति जताने को आश्चर्यजनक बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार टिहरी राज्य की परंपरा को मान्यता देकर पूजा परंपरा पर मनमानी थोप रही है।

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