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होमस्टे व वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना की जानकारी देने के लिए राज्य भर में आयोजित किये जायेंगे शिविर।

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होमस्टे व वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना की जानकारी देने के लिए राज्य भर में आयोजित किये जायेंगे शिविर।

पौड़ी, 23 नवम्बर,: जिला पर्यटन अधिकारी पौड़ी अतुल भण्डारी ने बताया हैं कि जनमानस को होमस्टे की जानकारी देने के लिए राज्य भर में शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने जानकारी दी है कि पर्यटन विभाग द्वारा वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना तथा दीनदयाल होमस्टे योजनाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य के सभी जनपदों के विभिन्न स्थानों पर जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे।

विभागीय अधिकारियों द्वारा शिविर लगाकर स्थानीय लोगों को इन योजनाओं के विषय मंे बारीकी से जानकारी दी जायेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक इन योजनाओं का अधिकतम लाभ पहंुचाना है। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना तथा दीनदयाल होमस्टे योजनाओं के अन्तर्गत उद्यमियों को आकर्षक सब्सिडी एवं ऋण का प्रावधान किया गया है।

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली योजना में किसी भी प्रकार के पर्यटन से संबंधित उद्यम लगाने पर मैदानी क्षेत्रांे में 25 प्रतिशत तथा पर्वतीय क्षेत्रों मंे 33 प्रतिशत की ऋण सब्सिडी मुहैया कराई जाती है। जबकि पर्यटक वाहन खरीदने की दशा में मैदानी तथा पर्वतीय क्षेत्रों मेें एक समान 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।

होमस्टे योजना को वह राज्य की बेरोजगारी तथा पलायन की समस्या का समाधान बताते हुए कहते है कि यदि स्थानीय लोग अपने घरों को होमस्टे के रूप में पंजीकृत करवाते अथवा अपनी भूमि पर नया होमस्टे बनवाते हैं या पुराने मकान का जीर्णोद्वार कर उसे होमस्टे के रूप में चलाते हैं तो इससे दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय पर्यटन अवसंरचनाओं की भरपाई होगी। इस प्रकार नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण पर्वतीय क्षेत्रों को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा सकेगा। बताया कि यदि एक क्षेत्र विशेष में 6 या अधिक होमस्टे पंजीकृत होते हैं तो सरकार सड़क, बिजली, पानी, पार्क आदि अवस्थापना कार्य करवाते हुए इसे क्लस्टर के रूप में विकसित करेगी और इसका राष्ट्रीय तथा अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।

होमस्टे योजना के अन्तर्गत मैदानी क्षेत्रों मंे 25 प्रतिशत अथवा 07 लाख 50 हजार और पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत अथवा 10 लाख रूपये तक की छूट का प्रावधान किया गया है। यही नहीं ब्याज में भी पहले 5 वर्ष तक मैदानी क्षेत्रों में एक लाख रूपये तथा पर्वतीय क्षेत्रों में एक लाख 50 हजार प्रतिवर्ष तक की छूट रखी गई है।

ग्रामीण लोगों को इस योजना की अधिकतम जानकारी उपलब्ध कराने के लिए शिविर लगाए जाने हेतु जनपदीय अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है। इन शिविरों में पर्यटन विभाग तथा बैंक के प्रतिनिधियों द्वारा लाभार्थियों को योजना से संबंधित औपचारिकताओं तथा उन्हें सरलतापूर्वक पूरा करने संबंधी विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति हाॅस्पिटैलिटी अर्थात् आतिथ्य सत्कार के क्षेत्र में कार्य करने का इच्छुक हो, वे अपने मकान को होमस्टे के रूप में पंजीकृत करवा सकते हैं तथा इस पर्यटक आवास के रूप में प्रयोग में ला सकते हैं। उन्होंने गांव छोड़ चुके लोगों से भी अपील की कि वे अपने गांव वापस लौट कर सरकार की इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने पैतृक आवासों तथा छानियों का पुनरूद्धार करें और उन्हें होमस्टे के रूप में संचालित करें। कहा कि इस प्रकार एक बार फिर गांव अपनी अर्थव्यवस्था को पुर्नजीवित कर सकेंगे।

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