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अल्मोड़ा में मनाई गई हेलन केलर की 141 वी जयंती

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हेलन केलर अक्सर कहा करती थीं, ‘आंखें होते हुए भी न देख पाना दृष्टिहीन होने से कहीं ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है’

संजय कुमार अग्रवाल

अल्मोड़ा : राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ अल्मोड़ा की साखा में समाज सेविका सुश्री हेलर केलर की 141 जयंती मनाई गई। कोविड 19 को ध्यान में रखते हुए आयोजन को सोशल डिस्टेंस के मानकों को ध्यान में रखते किया गया । कार्यकर्म में मुख्य अतिथि सुश्री स्वाति तिवारी , सदस्य दिव्यांग सलाहकार परिषद् ने अपने संबोधन में हेलन केलर के वक्तित्व व कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हेलर केलर के जीवन से हमें आज प्रेरणा लेकर आत्मसात कर समाज सेवा में चरितार्थ करने की आवश्यकता हैं। नेत्रहीन व अन्य रूप से दिव्यांग हेलर केलर के विषय में कुछ कहना जैसे सूर्य को दीपक दिखाना जैसा हैं।

हेलन केलर अक्सर कहा करती थीं, ‘आंखें होते हुए भी न देख पाना दृष्टिहीन होने से कहीं ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है’ 27 जून, 1880 को अमेरिका के अलाबामा प्रांत में जन्मी हेलन हमेशा से ऐसी नहीं थीं. 19 महीने की आयु में उन्हें गंभीर बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया. डॉक्टरों ने कह दिया था कि इस बच्ची का बचना अब मुश्किल है. हालांकि उनकी यह आशंका गलत साबित हुई और हेलन बच गईं, लेकिन इस बीमारी के चलते उनकी देखने-सुनने की शक्ति हमेशा के लिए जाती रही.

राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ द्वारा इस बर्ष का पुरस्कार पुरस्कार मंजू दानू विशेष अध्यापिका आवासीय संसाधन एवं रोजगार को दिया गया , यह पुरस्कार डॉक्टर ऊषा बोरा द्वारा अपनी माता माधवी की स्मृति में दिया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ के महासचिव डी के जोशी , पूर्व स्वस्थ्य निदेशक डॉक्टर जे सी दुर्गापाल ,कुमाऊं विश्वविद्यालय के योग विभाग के डॉक्टर ललित व अन्य वक्ताओं ने मूक बधिर व दृष्टि बाधित हेलन केलर के वक्तित्व पर प्रकाश डाला , कार्यकर्म का सञ्चालन जी सी दुर्गापाल ने किया।

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