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81 साल साल पुरानी कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन लिमिटेड करोड़ों रुपए के घाटे में,सरकारी से मदद की दरकार

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1939 में काठगोदाम से शुरू हुई कुमाऊं मोटर्स ऑनर्स यूनियन लिमिटेड करोड़ों रुपए के घाटे में चल रही है , इसके लिए यूनियन ने राज्य सरकार पर लगाया हैं उपेक्षा का आरोप

संजय कुमार अग्रवाल

अल्मोड़ा / हल्द्वानी : कुमाऊं की ऐतिहासिक परिवहन सेवा संस्था , “कुमाऊं मोटर ओनर यूनियन लिमिटेड” , करोड़ों के घाटे में आ चुकी है। कंपनी के निदेशक हिम्मत सिंह नयाल के नेतृत्व में 17 निदेशकों द्वारा संचालित संस्था , जिसमें 250 मोटर मालिक जुड़े हुए हैं , समूचे कुमाऊं में संस्था की चार सौ से अधिक बसों से प्रतिदिन तीन लाख से अधिक की इनकम होती है , इस आय से गाडी मालिक, ड्राइवर , परिचालक व स्टाफ सहित 500 लोगों के लगभग 2500 से 3000 परिवारों के सदस्य आज प्रभावित होकर भुखमरी की कगार पर आ गए हैं।

संस्था के प्रबंध निदेशक हिम्मत सिंह नयाल ने बताया कि आज तो कोरोना संकट का बहाना बनाया जा रहा है , लेकिन इससे पहले भी प्रदेश सरकार द्वारा संस्था को अपेक्षित सहयोग कभी नहीं किया गया , बल्कि न्यायालय के आदेशों तक का का अनुपालन नहीं किया गया । साथ ही स्वीकृत मार्ग रूट की पत्रावली को भी ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया है। जिससे आज संस्था के पास स्टाफ को वेतन देने के लिए रकम जुटा पाना भी मुश्किल हो गया है । स्तिथि यहाँ तक आ गयी है , कि संस्था अपनी परिसम्पतियों को बेचकर भी घाटा पूर्ण कर वेतन देने को तैयार है , परन्तु मंदी के कारण यह भी नहीं हो पा रहा है। संस्था के साथ – साथ वाहन मालिकों का भी बुरा हाल है , गाड़ियों के बीमे की किश्त , फिटनेस , परमिट इत्यादि नवीनीकरण हेतु रकम जुटा पाना भी मुश्किल हो गया है। नयाल का कहना है कि , सरकार द्वारा कोई राहत देने में सकारात्मक पहल नहीं की गई है।

संस्था बिगत तीन माह का वेतन भी नहीं दे पाई है। कोविद काल को ध्यान में रखते हुए बसों के संचालन के बारे में उन्होंने बताया की अभी जनता में दहशत बरकरार है , लोग बस में सफर करने से भी कतरा रहे हैं। जब रोडवेज को सवारी बीस से पच्चीस प्रतिशत भी नहीं मिल पा रहे हैं , ऐसी स्थिति में मोटर मालिक व संस्थान पर्यटन अभी बसों को चलने की स्थित में नहीं हैं। भविष्य में यदि कुछ स्थिति सामान्य होती है तो बसों के संचालन पर बोर्ड मीटिंग में विचार विमर्श किया जाएगा , कोविड काल में भी संस्था द्वारा बसें उपलब्ध कराइ गई हैं।
नयाल का कहना है कि प्रदेश सरकार को संस्था के प्रति सहानुभूति पूर्वक रवैया अपनाकर कुछ राहत देने की आवश्यकता है ताकि , संस्था से जुड़े परिवारों की जीवन संकट दूर हो सके।

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