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85 बर्षीय गब्बर सिंह का सवाल, आखिर कहाँ चल रही हैं अनाथों के लिए सरकरी योजना?

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रामरतन सिंह पंवार

जखोली। कहावत हैं ‘समय बड़ा बलवान होता है’। कथन सौ प्रतिशत सत्‍य है। पैसा, ताकत और इस दुनिया की हर चीज़ को समय के आगे घुटने टेकने ही पड़ते हैं। समय का चक्र जब घूमता है तो बड़े से बड़े और अमीर से अमीर इंसान को भी झुकना पड़ता है। आज हम जिक्र कर रहे हैं 85 बर्षीय गब्बर सिंह की , गब्बर सिंह पर जिम्मेवारी हैं अनाथ पोती और पोते को पालने की , और इनकम महज एक हजार, वो भी वृद्धावस्था पेंशन । दो दो बार आय प्रमाण पत्र बनवाये , जो कि उसे चार हजार में पड़े , और नतीजा दस सालों में उपजिलाधिकारी द्वारा सहायता के नाम पर एक कम्बल,और थोड़ा बहुत खाने का दिया सामान।

हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत त्यूंखर में रहने वाले दो अनाथ बच्चो की। भूमिका व सायन की । इन दोनों अनाथ बच्चों के माता-पिता का देहांत जवानी मे ही लगभग दस साल पहले हो चुका हैं ,माता-पिता की मृत्यु के समय भूमिका पांच वर्ष व उसका छोटा भाई सायन सिंह तीन साल के थे। आज भूमिका की उम्र पंद्रह साल व सायन सिंह की उम्र तेरह साल हो गयी है , लेकिन इन अनाथ बच्चों को सरकार से आज तक एक रुपये की आर्थिक सहायता नही मिला । हां इतना जरूर सच है कि सहायता के नाम पर उपजिलाधिकारी जखोली के द्वारा इन भाई -बहन को स्वयं इनके घर जाकर एक कम्बल व कुछ खाने-पीने की चीजें जरूर दी.

सोशल मिडिया मे खबर प्रकाशित होने के बाद जिला समाज कल्याण बिभाग की टीम मुयायना करने त्यूंखर गांव पहुंची और इन बच्चों से मुलाकात की । दोनों अनाथ बच्चे अपने 85 बर्षीय बुजुर्ग दादा गबर सिह के साथ रहते है,जिन्हे एक हजार रुपये बृद्धा
मिलती हैं उसके सहारे इन दोनों अनाथ बच्चों का भरण पोषण व स्कूल की पढाई का खर्च चलाते है। इस बीच बच्चों की परवरिश हेतू समाज कल्याण बिभाग ने पेंशन के लिए कुछ आवश्यक प्रमाण पत्र बनाने की सलाह बच्चों के दादा को दी, जिसमे तहसीलदार द्वारा जारी समाज कल्याण विभाग के नियमानुसार दो से तीन हजार तक का मासिक आय प्रमाण पत्र बना कर देना था, ताकि बच्चों को पेंशन व आर्थिक सहायता मिल सके।

ग्रामीण मान सिह सजवाण ने बताया कि उन्होंने मदद के तौर पर बुजुर्ग गबर सिंह का आय प्रमाण बनाये जाने संबंधित कागजात दो बार जखोली तहसील में जमा कराये थे , राजस्व उपनिरीक्षक त्युंखर ने भी परिवार को चार हजार मासिक बुजुर्ग कि आय होने की संस्तुति दी।
पटवारी को 85 बर्षीय बुजुर्ग व उनके अनाथ नाती नातिन की परिस्थिति का पूरा पता होने के बाबजूद भी पटवारी ने चार हजार मासिक आय की आख्या जानबूझकर तकाम कर दी गई ,तहसीलदार जखोली ने पुनः उन्हें चार हजार का आय प्रमाण पत्र बना कर दिया था गया। पटवारी और तहसीलदार के बीच फसी इस गुत्थी का फायदा समाज कल्याण विभाग ने उठाया और अनाथ बच्चे आर्थिक सहायता राशि राशि से बंचित रह गए ।
85 बर्षीय अनाथ बच्चों के दादा का कहना है कि मेरी या इन बच्चों के पास ऐसा कौन सा आय का साधन है,जो माह में हमारी आय चार हजार रुपये दर्शा दे गबर सिंह कहते हैं कि आखिर गरीबों के लिये सरकार कहती है ,कि हमने कई योजनाएं बनाईहैं व संचालित भी हो रही हैं , तो मेरे इन दो अभागे नाती-पोती के लिये कंहा गई वह योजनाएं।

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