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अल्मोड़ा। जच्चा-बच्चा की मौत जिम्मेवार कौन? मजिस्ट्रीयल जांच बिठाने से क्या होगा? आखिर कितनी मौतों के बाद खुलेगी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद

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लगातार हो रही मौतों के बाद भी नहीं जागा जिला व अस्पताल प्रशासन

राकेश चन्द्र डंडरियाल

अल्मोड़ा। बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय के तीन प्रमुख अस्पतालों में एक गर्भवती महिला को कोरोना के नाम पर इलाज न मिल पाने के कारण उसे अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा। ये मौत केवल मौत नहीं बल्कि जिले में बैठे उन निठल्ले और संबेदना हीन अधिकारियों की निष्क्रियता को दर्शाता है जो पिछले एक साल से लगातार हो रही इस मौतों के जिम्मेवार हैं। कोरोना की जांच के नाम पर गर्भवती को इधर से उधर भेजते रहे। अब आनन फानन में जांच का जिम्मा अपर जिला मजिस्ट्रेट बीएल फिरमाल को दिया गया है। गौरतलब है कि 20 अगस्त 2020 को आशा देवी पत्नी मुन्ना सिंह निवासी ग्राम कटारमल कोसी हवालबाग की मौत हो गई थी।
इस प्रकार की मौत पर अस्पताल प्रशासन कितने असंबेदनशील थे इसी बात से पता चलता है कि उसे लगातार इधर उधर भटकाया गया। क्या जिला प्रमुख चिकित्सा अधिकारी अपनी जिम्मेवारी से भाग सकेगें? क्या जिलाअधिकारी नितिन सिंह भदौरिया जिले में लगातार हो रही इस प्रकार की घटनाओं के लिए अपनी जिम्मेवारी से भाग सकेंगे? निसंदेह इनका तो कुछ बिगड़ेगा नही , मरना तो पहाड़ की भोली भाली जनता को है। अगर यह पहला मामला होता तो अधिकारियों को बचने का मौका होता,लेकिन अब तो हद हो है। आखिर जिले में इतनी मौतों के बाद भी क्यों नहीं जागे अधिकारी?

अल्मोड़ा में यह पहला मामला नहीं है जब इस प्रकार की घटना हुई हो। जुलाई 2020:बागेश्वर जिले के बनेग गांव निवासी गर्भवती गीता (25) (२५) की जिसे बागेश्वर से अल्मोड़ा लाया गया था उसकी भी अल्मोड़ा अस्पताल में मौत हो गई । सितंबर २०१९ शिव मंदिर लाइन निवासी शीतल (20 वर्ष) पत्नी अर्जुन की भी प्रसव पीड़ा के दौरान ही मौत हो गई।

पहाड़ में दम तोड़ चुकी स्वास्थ्य सेवाओं के चलते आये दिन गर्भवती महिला या फिर नवजात शिशु मौत होना अब आम होने लगा है। खासकर अल्मोड़ा और बागेश्वर में।

अक्टूबर 2019 गंगोलीहाट में विधायक मीना गंगोला की देवरानी दीपा गंगोला को प्रसव पीड़ा होने पर बीते उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। चार घंटे तक अस्पताल में इलाज के बाद डॉक्टरों ने उचित स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं होने का हवाला देकर हायर सेंटर ले जाने की सलाह दे दी। जिसके बाद परिजन महिला को आपात सेवा 108 से अल्मोड़ा को ले आए। अल्मोड़ा लाते समय कांचुलापुल के पास महिला को प्रसव पीड़ा बढ़ गई। 108 को रोक कर महिला का प्रसव कराया गया। तब महिला ने स्वस्थ नवजात बच्ची को जन्म दिया। फिर 108 जच्चा और बच्चा को लेकर रात करीब नौ बजे अल्मोड़ा अंजलि अस्पताल पहुंची। लेकिन इलाज के बीच में बच्चे की मौत हो गई।

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