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नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान : अधिक दवा भी नशा पैदा करती है, डॉ.जे सी दुर्गापाल

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संजय कुमार अग्रवाल

अल्मोड़ा : नशे के खिलाफ जागरुकता सप्ताह प्रत्येक साल 26 जून को मनाया जाता हैं। सरकार का मकशद सभी को नशे से होने वाले प्रभावों से जागरुक करना हैं । इस अवसर पर अल्मोड़ा में भी एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें बोलते हुए नेत्र चिकित्सक डॉ.जे सी दुर्गापाल ने कहा कि दवा का अधिक प्रयोग भी नशा पैदा करती है, और हमारे शरीर के लिए अत्यधिक घातक हो सकती ह। इसके कारण मनोविकार, आत्महत्या जैसी विकृतियां पैदा होती हैं। डॉक्टर दुर्गापाल यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि मोबाइल भी एडिक्शन पैदा करता है। दवाएं, मानसिक रोग को जन्मता है, और मानसिक रोगी पूरे समाज के लिए घातक सिद्ध होता है। नशे की गिरफ्त के कारण मन विचलित होने से भटकने व एकाकीपन की स्थिति पैदा हो जाती है। जिसे ये लत लग जाती हैं और जब उसे को दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती , तो नशा करने वाले आदमी में भटकाव में आ जाता है। फिर व्यक्ति एकाकीपन महसूस करने लगता है।

वह इंक रिमूवर, चरस, अफीम आदि का प्रयोग कर अपने शरीर को खोखला करता है। नशे से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शरीर शिथिल तो होता ही है, साथ ही साथ शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। पंजाब नशे के चर्चित है, ऐसे में हमें उत्तराखंड को उड़ता पंजाब नहीं बनने देना है। उत्तराखंड की पुलिस नशे और नशेड़ियों पर नकेल कसने के लिए ऑपरेशन सवेरा चला रही है। यह काबिले तारीफ है। हमें नशे और नशेड़ियों से दूर रहने के लिए अपने स्तर से पहल भी करनी चाहिए।

नशे के खिलाफ जागरुकता सप्ताह को सम्बोधित करते हुए डॉ. ललित योगी ने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने स्तर पर बच्चों को समझाए, उन्हें नशे से होने वाले नुकशान से अवगत कराएं। बालक पन में ही बच्चे की हर गतिविधि पर विशेष ध्यान दें। साथ ही अपने पास-पड़ोस में हो रही नशे की हर गतिविधि पर ध्यान रखकर पुलिस को सूचना देकर पहल भी करनी चाहिए।
गोष्ठी में रमेश राम, सुंदर राम, खीम सिंह, भारत प्रसाद,बालम सिंह, केशर सिंह आदि मौजूद थे।

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