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42 साल पहले बनी एशिया की सबसे लम्बी लास्तर नहर को हैं,मरम्मत का इन्तजार

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तत्कालीन विधायक कामरेड विधासागर नौटियाल ने लस्तर नहर को स्वीकृत कराने में निभाई थी अहम भूमिका

दिलवर सिंह बिष्ट/रामरतन सिंह पंवार

रुद्रप्रयाग/जखोली। क्या आप जानते हैं, कि एशिया की सबसे ऊंचाई पर बनी सबसे लंबी नहर(गूल) किस प्रदेश व किस जिले व किस क्षेत्र में हैं । तो लीजिये हम आपको बता देते है कि उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग जिला जो ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर धार्मिक ,पर्यटन के लिए विश्व विख्यात है , उसी जनपद के विकासखंड जखोली मे निर्मित ऐतिहासिक समुद्र तल से लगभग 6,400 फिट की ऊंचाई पर स्थित हैं 28 गांवों को सींचने के लिए बनाई गई लस्तर नहर जिसकी लम्बाई लगभग 31 किलोमीटर है। चौक गए ना आप , नहर और वह भी 31 किलोमीटर की?

लेकिंग आज इसे उत्तराखंड और खासकर रुद्रप्रयाग के सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य इस नहर की देखरेख करने वाला कोई नहीं हैं। करोडों रुपये से बनाई गई,इंजीनियरिंग के इस अद्भुत ,अनोखे प्रयोग को अगर जरूरत हैं तो महज इसके रखरखाव की , लेकिन रखरखाव के आभाव में आज यह नहर अब दम तोड़ने लगी हैं।

लस्तर नहर का निर्माण 1977-78 में हुआ था । तत्कालीन विधायक कामरेड विद्यासागर नौटियाल ने जब देखा कि बांगर क्षेत्र के लस्तर नदी में खेतों की सिंचाई हेतु प्रर्याप्त पानी है, तो विधायक ने लस्तर गाड़ पर सिंचाई नहर बनाने की स्वीकृति प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई थी ।बताया जाता है कि तब लस्तर नहर के निर्माण मे लगभग एक करोड़ का खर्च हुआ था। जो कि पूर्व में 29 किलोमीटर बांगर पट्टी के लस्तर गाड़ से बामनगांव तक बनाई गई थी।तत्पश्चात बामनगांव से बाजीरा तक वर्ष2011-12में 1.8किलोमीटर तक विस्तार किया गया इस प्रकार नहर की कुल लंबाई 30.8 किमी निर्मित है।जो कि कठिन परिस्थितियों मे चट्टान काटकर एवं नालों/गदेरों में अक्वाडथ बनाकर निर्मित किया गया यह नहर पूर्ण रूप से खुलीगुरुत्व चैनल नहर है ,नहर का कमांड एरिया 1165 हेक्टेयर, सिंचन क्षमता 1024 हेक्टेयर ह। जबकि वर्तमान में कास्तकारों द्वारा 498 हेक्टेयर सिंचाई की जा रही है। नहर के रख-रखाव व कृषकों की सुविधानुसार नहर के अंतिम भाग तक पानी पंहुचाना सिंचाई खंड रुद्रप्रयाग के आधीन है।

अधिशासी अभियंता सिंचाई प्रताप सिंह बिष्ट का कहना है कि कृषकों के हित को ध्यान में रखते हुए खरीफ की फसल वर्ष 2020-21 की सचाई हेतु 28 गावों /ग्रामवार रोस्टर प्रणाली के माध्यम से सिचाई सुविधा उलब्ध कराई जाती है। रोस्टर के मुताबिक सोमवार से बुधवार को 0.00किमी से 14किमी ,तक लाभान्वित ग्रामों में धारकुड़ी,कोट,सन,जखवाड़ी ताली,मली, लीसवालटा,खलियान,मुन्याधर,गुरुवार से शुक्रवार तक 14 से 22 किमी पौण्ठी, भटवाड़ी,चौरा,नंदबामन गांव, सिराई, कुण्डियाली,बचबाड़, शनिवार से रविवार को 22 से 30.800किमी ग्राम, कपनियां,पौनाजोली,कोठीपाड़ा,बरसीर,चौन्दी,ललूडी,मयाली,जखोली,लम्बाड, देवल ,खरियाल,वामनगांव व वजीरा तक सींच हेतु पानी विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाता है।

अधिशासी अभियंता सिंचाई प्रताप सिंह बिष्ट ने बताया की वर्तमान समय मे एशिया की सबसे ऊंची और लम्बी नहर एवं उसके कमांड में स्थित गुलें क्षतिग्रस्त हो गई हैं , जिसके मरम्मत हेतु सचाई विभाग को 873.61लाख का आगणन प्रेषित किया गया है। जिसके स्वीकृत एवं धन आवंटन होने पर लस्तर नहर व उससे जुडी गूलों की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। मरम्मत हो जाने के बाद किसानो ,काश्तकारों को बेहतर सिंचाई सुविधा प्रदान की जा जाएगी ।जिससे न केवल कास्तकारों की आर्थिकी में सुधार होगा बल्कि पलायन को रोकने में भी कारगर साबित हो सकता है।

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