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सकारात्मक पहल : “आम के आम गुठली के दाम”

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यदि उत्तराखंड सरकार प्रवासियों को कृषि संसाधन मुहैया कराती हैं तो इस मुहावरे को चरितार्थ कर सकते हैं जिले के ये युवा

दिलवर सिंह बिष्ट

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में परंपरागत कृषि हो या अन्य उद्योग इन्हें वास्तविक रूप में धरातल पर उतारने की मंशा सरकार ने व्यक्त की हैं। इस कार्य को करने के लिए वैश्विक महामारी के दौर में जो भी प्रवासी हैं या स्थानीय बेरोजगार युवकों युवतियों, को प्रशासन द्वारा उनकी किस क्षेत्र में रुचि है ,उस के अनुसार काम दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें नजदीकी क्षेत्र में प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। जिसके बाद उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो एक और जहाँ इन लोगों को लाभ ही होगा वही सरकार को भी फायदा होगा और कहावत भी चरितार्थ भी होगी “आम के आम गुठली के दाम”।

आजकल इस कार्य को साकार करने में लगे हुए हैं बचन्स्यु क्षेत्र के कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी, व न्याय पंचायत पौड़ीखाल प्रभारी राजेन्द्र सिंह रौथाण। उन्होंने युवाओं को बंजर भूमि को आबाद करने की ललक को पूरा करने की हसरत पाले युवाओं को कृषि यंत्र उपलब्ध करा कर उनकी मदद की है और जो जमीन विगत कई सालों से बंजर पड़ी थी उसे हल लगा कर उपजाऊ बनाने का नायाब तरीका अपनाया हैं।

गौरतलब हैं कि कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में फ़ोटो स्टुडियो में काम करने वाले , होटल में कार्य करने वाले सतेंद्र सिंह बिष्ट,धीरेन्द्र सिंह बिष्ट व भरत सिंह गुजरात में काम करते थे ,ये लोग लॉक डाउन से पहले ही घर आ गए थे ।लॉकडाउन से ऊब कर इन तीनों ने वर्षों से बंजर भूमि को आबाद करने की ठानी, जिसमे उनका सहयोग किया सहायक कृषि अधिकारी खांकरा पौड़ीखाल प्रभारी राजेन्द्र सिंह रौथाण ने , उन्होंने ग्राम शिवपुरी में कृषि समूहों को उपलब्ध कराए गए फार्मेसी मसनरी बैंक के तहत पावर बीटा को गांव से उपलब्ध कराया व साथ मे कृषि सम्बन्धित उपकरण फावड़े कृषि गार्डन, कुदाल सहित जो भी यंत्र सम्भव हो सके उपलब्ध कराए।

यही नहीं सहायक कृषि अधिकारी ने कोरोना काल के दौरान कृषि समूहों को मास्क व सेनिटाइजर तक मुहैया कराया गया। आज इन युवाओं ने वर्षो से बंजर पड़ी भूमि पर स्थानीय आनाज व परम्परागत कृषि शुरू कर दी हैं । इन युवकों का कहना है कि विगत दिवस जिला उद्यान कार्यालय में गए थे, जहां उन्हें उधान अधिकारी श्री आर्य ने जलवायु के हिसाब से कीवी ,सेब व बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिये उन्हें विभागीय स्तर से जो भी होगा उन्हें उससे लाभान्वित करने और क्षेत्र का भर्मण कर वहां के जलवायु के हिसाब से योजना उन्हें शीघ्र दी जाएगी।

युवाओं का कहना है कि उन्हें परम्परागत कृषि,बागवानी, मत्स्य पालन,मधुमक्खी पालन,मशरूम व साग सब्जी सहित तमाम सरकार की योजनाओं का प्रशिक्षण दिया जाय। जिससे कि वे अन्य युवाओं को भी अपनी योजनाओं में साथ जोड़ सके ,जिससे कि उनकी आर्थिक स्थिति व बेरोजगारी दूर हो सके।

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