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चला गया पहाड़ का हीरा : म्यारा मनिला डांडी की बलाई लेने वाला हीरा

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हीरा सिंह राणा (1942 -2020 )

ग्राम डंडोली, मानिला, सल्ट निवासी
78 बर्ष के थे हीरा सिंह राणा
15 साल की उम्र से वह उत्तराखंड की संस्कृति से जुड़े गीत गाने लगे थे।
हीरा सिंह राणा ने अभी तक 320 से अधिक गाने गए थे।

राजसत्ता न्यूज़ ब्यूरो

दिल्ली : कुमाऊनी गायक,संगीतकार,हीरा सिंह राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। 78 साल के हीरा सिंह राणा को आज सुबह दो से ढाई बजे की बीच अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। राणा का निधन उनके दिल्ली स्थित विनोद नगर इलाके में हुआ।वर्तमान में वे दिल्ली सरकार द्वारा गठित कुमाऊनी, गढ़वाली और जौनसारी भाषा अकादमी के उपाध्यक्ष भी थे।

हिरदा कुमाऊनी के नाम से प्रशिद्ध हीरा सिंह राणा का जन्म 16 सितंबर 1942 को उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल के ग्राम-मानिला डंढ़ोली, जिलाअल्मोड़ा में हुआ था।उनकी प्राथमिक शिक्षा मानिला में हुई जिसके बाद वे दिल्ली में नौकरी करने आ गए। लेकिन हर दिल मिजाज हीरा का मन नौकरी में मन नहीं लगा तो 15 साल की अवस्था में ही उत्तराखंड की संस्कृति से जुड़े गीत गाने लग गए थे।

कैसेट संगीत के युग में हीरा सिंह राणा के कुमाउनी लोक गीतों के अल्बम रंगीली बिंदी, रंगदार मुखड़ी, सौमनो की चोरा, ढाई विसी बरस हाई कमाला, आहा रे ज़माना जबर्दस्त हिट रहे। उनके लोकगीत ‘रंगीली बिंदी घाघरी काई,’ ‘के संध्या झूली रे,’ ‘आजकल है रे ज्वाना,’ ‘के भलो मान्यो छ हो,’ ‘आ लिली बाकरी लिली,’ ‘मेरी मानिला डानी,’ कुमाऊनी के सर्वाधिक लोकप्रिय गीतों में शुमार हैं।

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