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10 वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए “गिर्दा” यानि गिरीश तिवारी

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संजय कुमार अग्रवाल

अल्मोड़ा,22 अगस्त। गिरीश तिवारी “गिर्दा” की 10 वीं पुण्यतिथि पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गिर्दा सामाजिक, राजनीतिक व गैर बराबरी के ख़िलाफ़ चलने वाले आंदोलनों में ज़िंदा रहेंगे और संघर्षशील ताकतों को ताकत देते रहेंगे।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में हुई संगोष्ठी में उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी. सी. तिवारी ने कहा कि गिर्दा ने सत्ता प्रतिष्ठानों की मनमानी के सीधे संघर्षों में उतर उन्हें सांस्कृतिक मंचों पर भी चुनौती दी।

कोरोना महामारी के कारण पार्टी कार्यालय में गिर्दा की सांस्कृतिक धारा का मूल्यांकन करते हुए गिर्दा के साथ उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी के दौर से रहे उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी. सी. तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार की नौकरी में रहने के बावजूद उन्होंने हमेशा सड़क पर उतर कर शासन प्रशासन को चुनौती दी। उत्तराखंड में चिपको, वन बचाओ, नशा नहीं रोज़गार दो एवं ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं के आंदोलनों का खुलकर समर्थन किया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता पार्टी की केंद्रीय सचिव श्रीमती आनंदी वर्मा एवं संचालन रंगकर्मी विहान के सांस्कृतिक ग्रुप के देंवेंद्र भट्ट ( रिक्की ) ने किया। संगोष्ठी में प्रकाश उनियाल ने कहा कि वे पहाड़ की मिट्टी के संस्कृति कर्मी थे। धीरेन्द्र मोहन पंत ने कहा कि गिर्दा की रचनाओं में मुर्दों में जान डालने की ताकत थी। छात्र नेता दीपा नेगी ने कहा कि गिर्दा की धारा गिर्दा से पहले भी थी और गिर्दा के बाद भी रहेगी। रेशमा परवीन ने कहा कि गिर्दा की चेतना जन आंदोलनों की चेतना है। श्रीमती शशि उनियाल ने कहा कि उनकी रचनाएं उन्हें हमेशा प्रेरित और हर्षित बनाए रखेंगी। संगोष्ठी में गोपाल राम, पूरन सिंह मेहरा, अनीता बजाज, राजू गिरी, चंपा सुयाल आदि लोग उपस्थित थे।

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