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कोरोना काल में कैसे उम्मीद बनी अल्मोड़ा पुलिस , देखिये वीडियो में

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संजय कुमार अग्रवाल /राकेश चंद्र डंडरियाल

अल्मोड़ा : भारत जैसे देश में आम नागरिक के मन में पुलिस बिभाग के लिए उतना सम्मान नहीं होता हैं, जितना की किसी सैनिक के लिए। लेकिन आंतरिक शांति को बनाये रखने के साथ साथ जब पुलिस नागरिकों ,बूढ़े बुजर्गो, छात्रों का सहारा बनती है, तो आम नागरिको के मन में भारतीय पुलिस के लिए सम्मान जागना स्वाभाविक हैं। ऐसा ही काम आजकल कोविड 19 के दौरान लॉकडाउन में उत्तराखंड में अल्मोड़ा की पुलिस कर रही हैं। और इसका श्रेय जाता हैं, अल्मोड़ा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा को, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान, जब आम जनता परेशान थी , उस समय सामने आकर जो मानवीय चेहरा दिखाया वह वास्तव में तारीफे काबिल हैं , यह चेहरा था उम्मीद का ,जी हाँ उम्मीद, बीमारों की उम्मीद , छात्रों की उम्मीद , उम्मीद दूर दराज़ में बीमार हुए रोगियों की और वह भी पुलिस से?

इन उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिस की एक ईमानदार पुलिस अधिकारी प्रहलाद नारायण मीणा ने जिन्होंने अपने साथियों के साथ कदम से कदम मिलकर इसे सार्थक कर दिखाया। इस मुहीम से अल्मोड़ा पुलिस ने वास्तव में मित्र पुलिस के नारे को चरितार्थ किया हैं। इस कार्य में अल्मोड़ा पुलिस की मीडिया प्रभारी हेमा ऐठानी तथा फ़ोन कॉल पर बैठे पुलिस कर्मी, तथा सीनियर सब इंस्पेक्टर नीरज भाकुनी का सराहनीय योगदान रहा।

ये उम्मीद कैसे आगे बड़ी आप इस वीडियो में देख सकते हैं ,

कि कैसे प्रदेश में लॉकडाउन के दौरान जब सब कुछ बंद था , तो उस दौरान अल्मोड़ा पुलिस ने मीलों मील का सफर तय करके मरीजों तक उनकी दवाइयां पहुचाई। लॉकडाउन के दौरान अल्मोड़ा पुलिस ने 141 बीमारों को उनकी दवाइयां अल्मोड़ा ही नहीं बल्कि बागेश्वर, पिथौरागढ़ , उधमसिंह नगर , तक पहुचाई। अगर कुछ करने का जज्बा हो तो इसमें बॉर्डर कभी आपके रास्ते नहीं रोकते है। अगर ऐसा होता तो क्या अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा इतने जिलों में ऐसा कर पाते , इसके लिए जरुरत हैं जज्बे की , कार्यकुशलता की , और कुछ अलग कर गुजरने की, जो अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा व उनके सहयोगियों ने कर दिखाया हैं ।

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